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शनिवार, 17 सितंबर 2016

E = mc2 सामान्य सापेक्षता के सिद्धांत को समझे आसानी से-E = mc2 General theory of relativity, understand easily

 Irfan point     भौतिक विज्ञान, विज्ञानं, सामान्य विज्ञानं   

E = mc2 सामान्य सापेक्षता के सिद्धांत को समझे आसानी से-General theory of relativity, understand easily
उनके के सापेक्षता के सिद्धांत की मदद से आइंस्टीन ने यह अनुमान लगाया था की ब्रह्माण्ड का कोई निश्चित दर नहीं हैं. ब्रह्माण्ड की सभी चीज़े एकदूसरे के सापेक्ष बढ़ रही हैं मतलब की एकदूसरे से सापेक्ष मात्र में दूर जा रही हैं. इसलिए इसे सामान्य सापेक्षता का सिध्धांत कहाँ जाता हैं.

E = mc2सामान्य सापेक्षता के सिद्धांत को समझे आसानी से-E = mc2 General theory of relativity, understand easily
समय हर किसी के लिए एक ही दर पर नहीं चलता (बीतता) हैं. तेजी से चल रहा (तेजी से मूवमेंट कर रहा) एक पर्यवेक्षक किसी स्थिर पर्यवेक्षक के मुकाबले समय को थोडा धीरे से बीतता हुआ महसूस करेंगा. इस घटना को समय का फैलाव (time dilation) कहा जाता है. उदहारण के लिए आप अपने हाथ की घडी को हिलाएँगे तो देखेंगे की तब उसका सेकंड कांटा एक सेकंड बिताने में थोडा ज्यादा वक़्त लेता हैं. इससे हम कह सकते हैं की मूवमेंट करती हुई घडी स्थिर घड़ी के मुकाबले अधिक धीरे से चलती हैं.
एक तेजी से चल रही वस्तु उसकी गति की दिशा में किसी धीरे से चल रही वस्तु के सापेक्ष में थोड़ी छोटी दिखाई देती हैं. वैसे यह असर काफी सूक्ष्म होता हैं. जब तक वस्तु गति प्रकाश की गति के करीब नहीं पहुंचती तब तक यह घटना दिखाई नहीं देती.

द्रव्यमान और ऊर्जा एक ही चीज़ के विभिन्न अभिव्यक्तियाँ हैं. आइंस्टीन के प्रसिद्ध समीकरण E = mc2, का मतलब कुछ इस तरह हैं, जहाँ E = ऊर्जा, m = द्रव्यमान और c = प्रकाश की गति. यहीं चीज़ ही एक परमाणु विस्फोट से निकलती हुई ऊर्जा की एक बड़ी राशि की रिहाई के लिए खुद को सक्षम बनाती है.

E = mc2 के एक परिणाम स्वरुप, एक तेजी से चलती हुई चीज़ का वजन धीमी गति से चलती हुई वस्तु के सापेक्ष में ज्यादा मालूम पड़ता हैं. यह इसलिए क्योंकि, वस्तु की गति बढ़ने के साथ ही उसकी गतिज ऊर्जा बढ़ जाती है और इसलिए उसका वजन भी बढ़ जाता हैं (मास = ऊर्जा).

आइंस्टीन कहते थे की वजन में वृध्धि ही एक कारण हैं, की पदार्थ प्रकाश की गति से ज्यादा तेजी से गति नहीं कर सकता. अगर किसी चीज़ का वजन उसकी गति से साथ बढ़ता ही जाता हैं तो प्रकाश की गति तक पहोंचने पर वह अनंत हो जाएगा, और अनंत वजन को स्थानांतरित करने के लिए अनंत ऊर्जा की आवश्यकता होती है. इसलिए यह असंभव है.

अंतरिक्ष और समय, एक सत्य का हिस्सा हैं जिसे space-time कहाँ जाता हैं. आइंस्टीन के गणित के मुताबिक अंतरिक्ष के तीन आयाम है, और चौथा आयाम समय है. हाल के सिद्धांतों के अनुमान के मुताबिक अतिरिक्त आयाम हम अनुभव नहीं करते हैं. space-time को हम फैब्रिक के एक ग्रीड के स्वरुप में सोच सकते हैं. बड़े पैमाने पर मास की उपस्थिति space-time को विकृत करती हैं. इसलिए रबड़ शीट मॉडल एक लोकप्रिय उदहारण है.

यह सिध्धांत बताता हैं की गुरुत्वाकर्षण कहाँ से आता है? रबड़ शीट मॉडल से पता चलता हैं की गुरुत्वाकर्षण अंतरिक्ष में रही भरी चीजों की वजह से पैदा होता हैं, जो space-time को बेंड करती हैं या तान देती हैं (warping). और ऐसे ताने (warp) को गुरुत्वीय कुंवा (gravity well) कहा जाता हैं. परिक्रमा करती चीज़े कम से कम और ऊर्जा की कम से कम राशि की आवश्यकता हो ऐसे मार्ग का अनुसरण करती हैं. जैसे की हमारे सूरज के आसपास घूमते हुए ग्रह.

गुरुत्वाकर्षण प्रकाश को मोड़ता या झुकता है. इस घटना को गुरुत्वाकर्षण लेंसिंग कहा जाता है. जब हम एक दूर की आकाशगंगा का निरीक्षण करते हैं, तब पृथ्वी और आकाशगंगा के बीच की चीजों का गुरुत्वाकर्षण प्रकाश की किरणों को अलग अलग रास्तो में मोड़ देता हैं. जब प्रकाश दूरबीन तक पहुँचता है, तब हमें एक ही आकाशगंगा की अनेक छवि दिखाई देती हैं.
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शुक्रवार, 16 सितंबर 2016

क्या अग्नि को तेज इश्वर से मिला है ?-Fire of God has intensified -

 Irfan point     आध्यात्मिक-विज्ञानं, ये भी जाने, विज्ञानं, सामान्य विज्ञानं   

आग क्या होती है --

आग एक ठोस चीज़ की तरह दिखती है, लेकिन यह नहीं. यह वास्तव में सिर्फ वाष्प है. आग दहन(combustion) नामक एक रासायनिक प्रतिक्रिया का परिणाम होती हैं. दहन प्रतिक्रिया में एक निश्चित बिंदु पर आग की लपटें उत्पन्न होती हैं. इस बिन्दु को इग्निशन बिंदु(ignition point) कहा जाता है. आग की लपटें में मुख्य रूप से कार्बन डाइऑक्साइड, जल वाष्प, ऑक्सीजन और नाइट्रोजन से मिलकर बनती है. आग गर्मी और प्रकाश का उत्सर्जन करती है. आग उत्पन्न करने के लिए इन तीन चीजों का होना बहुत जरुरी हैं : ईंधन, ऑक्सीजन और उर्जा.
अग्नि को तेज इश्वर से मिला है ?-Fire of God has intensified -

आग गर्म क्यों होती हैं ?

आग गर्म होती हैं क्योंकि, दहन की प्रक्रिया के दौरान इंधन पदार्थ के रासायनिक बांड्स टूटते हैं और बनते हैं. इसकी वजह से थर्मल एनर्जी उत्पन्न होती हैं. दहन के दौरान इंधन और ऑक्सीजन का कार्बन डाइऑक्साइड और पानी में रूपांतरण होता हैं. इस प्रक्रिया को शुरू करने के लिए उर्जा की जरुरत होती हैं जिससे इंधन और ऑक्सीजन के परमाणुओं के बिच के बांड्स टूटते हैं. लेकिन इसमें ज्यादा उर्जा तब रिलीज़ होती हैं जब यह रासायनिक बांड्स कार्बन डाइऑक्साइड और पानी के स्वरुप को धारण करते हैं. इसमें धुएं  के स्वरुप में कुछ अस्थिर गैसें बाहर निकलती हैं. यह धुआं ज्यादातर हाइड्रोजन, कार्बन और ऑक्सीजन से बना होता हैं.
ईंधन + ऑक्सीजन + ऊर्जा → कार्बन डाइऑक्साइड + पानी + अधिक ऊर्जा

 अगर लकड़ी के दहन के दौरान अस्थिर गैसें पर्याप्त गर्मी(260 degrees C) प्राप्त कर लेती हैं तब उसके अणु टूट जाते हैं और उसके परमाणु ऑक्सीजन के साथ पानी, कार्बन डाइऑक्साइड और अधिक ऊर्जा के स्वरुप को धारण करने के लिए फिर से जुड़ते हैं. दूसरे शब्दों मई कहे तो वे जलते हैं. दहन के दौरान प्रकाश और गर्मी रिलीज़ होते है. लपटें उर्जा की मौजूदगी का सबूत होती हैं. लपटें ज्यादातर गर्म गैसों से मिलकर बनती है. आग का प्रकाश दहन प्रतिक्रिया का एक दृश्य संकेत है, लेकिन तापीय ऊर्जा (गर्मी) अदृश्य हो सकती है. इससे प्रकाश उत्पन्न होता हैं क्योंकि, पदार्थ गरमागरम प्रकाश का उत्सर्जन करने के लिए पर्याप्त गर्म हो चूका होता हैं. आग की लपटें आयनीकृत गैसों से प्रकाश का उत्सर्जन करती हैं जिसकी वजह से एक चमक दिखती हैं. अगर लपटें पर्याप्त रूप से गर्म हो जाती हैं तो उसके अन्दर के वायु आयनित हो जाते हैं और आग का नया स्वरुप मिलता हैं : प्लाज्मा.

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TIME TRAVEL-क्या समय यात्रा की जा सकती है -What can time travel.

 Irfan point     विज्ञानं, समय यात्रा   

समय यात्रा TIME TRAVEL के बारे में सोचना दिमाग चकरा देनेवाली बात हैं. क्या समय यात्रा संभव हैं? Is Time Travel Possible? Time Travel Theory के अनुसार, क्या होगा अगर आप समय में पीछे भूतकाल में जाकर अपने माता-पिता को मिलने से रोक दे. उन्हें कभी एक-दूसरें से मिलने ही ना दे. इसका मतलब होगा की आप अपने खुद के जन्म को ही रोक देंगे. लेकिन अगर तब आपका जन्म ही नहीं हुआ था तो आप भूतकाल में कैसे जा सकते हैं. इस चीज़ का तो कोई मतलब ही नहीं होता.
TIME TRAVEL-क्या समय यात्रा की जा सकती है -What can time travel.

हम सब समय में यात्रा करते हैं. पिछले साल से में एक साल समय में आगे बढ़ चूका हूँ. दूसरें शब्दों में कहूँ तो हम सब प्रति घंटे 1 घंटा की दर से समय में यात्रा करते हैं. लेकिन यहाँ पर सवाल यह है कि क्या हम प्रति घंटे 1 घंटा की दर से भी ज्यादा तेजी से यात्रा कर सकते है? क्या हम समय में पीछे जा सकते हैं? क्या हम प्रति घंटे 2 घंटे की रफ़्तार से यात्रा कर सकते है? 20 वी सदी के महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन ने विशेष सापेक्षता (Special Relativity) नामक सिद्धांत विकसित किया था. विशेष सापेक्षता के सिध्धांत के बारे में तो कल्पना करना भी मुश्किल हैं क्योंकि यह रोजमर्रा की जिंदगी से कुछ अलग तरह की ही चीज़े उजागर करता हैं. इस सिध्धांत के मुताबिक समय और अंतरिक्ष एक ही चीज़ हैं. दोनों एकदूसरे से जुड़े हुए हैं. जिसे space-time भी कहते हैं. space-time में कोई भी चीज़ यात्रा कर रही हो उसकी गति की एक सीमा हैं- 3 लाख किलोमीटर. यह प्रकाश की गति हैं.

Theory of relativity-सापेक्षता का सिदान्त क्या कहता है -


विशेष सापेक्षता का सिध्धांत यह भी दर्शाता हैं की space-time में यात्रा करते वक्त कई आश्चर्यजनक चीजे होती हैं, खास कर के जब आप प्रकाश की गति या उसके आसपास की गति पा लेते हैं. जिन लोगो को आपने पृथ्वी पर पीछे छोड़ दिया हैं उनकी तुलना में आपके लिए समय की गति कम हो जाएगी. आप इस असर को वापस आए बिना नोटिस नहीं कर सकते हैं. सोचिए की आपकी उम्र अभी 15 साल की हैं और आप एक अंतरिक्ष यान में प्रकाश की गति की तुलना में 99.5% तक की गति पा लेते हैं. अपनी यात्रा के दौरान आपने अपने 5 जनमदिन सेलिब्रेट किए, यानी आपने अंतरिक्ष यान में 5 साल बिताए. 5 साल के सफ़र के बाद आप 20 साल की उम्र में अपने घर वापस आते हैं. आप देखेंगे की आपकी उम्र के आपके दोस्त 65 साल के हो गए होंगे. क्योंकि अंतरिक्ष यान में समय आपके लिए ज्यादा धीरे से बिता था. आपने जितने समय में 5 साल अनुभव किए उनते ही समय में आपके दोस्तों ने 50 साल महसूस किए.
time travel
आप जितनी तेज मूवमेंट करेंगे समय की गति आपके लिए कम हो जाएगी. मेरा खूद का एक अनुभव बताता हूँ. जब में सुबह जोगिंग करने के लिए जाता हूँ तब ज्यादातर मेरे काने में headphones लगे हुए होते हैं. मैंने कई बार नोटीस किया की जब में काफी देर तक दौड़ने के बाद थक जाता हूँ और मेरे दिल की धड़कन तेज हो जाती हैं तब में किसी जगह आराम के लिए रुकता हूँ. तब मेरे कान में लगे हुए headphones में बज रहा गाना काफी धीमी गति से चलता महसूस होता हैं. जैसे की किसी ने गाने की रफ़्तार कम कर दी हो. वैसे मेरे दौड़ने के दौरान भी गाने की गति धीमी ही महसूस होती हैं. यह बात सिर्फ दौड़ने के विषय तक ही सिमित नहीं हैं. ऐसी कोई भी मूवमेंट जो की काफी तेजी से की गयी हो और आप का दिल तेजी से धडकने लगा हो औए आप हाफ़ने लगे हो. समय की रफ़्तार आप को थोड़ी कम लगेगी. आप एक काम कीजिए अपने हाथ में अपनी घडी लीजिये और उसे पकड़कर उसे हवा में मूव कीजिए और देखीए. आप देखेंगे की घडी के मूवमेंट के दौरान एक एक सेकंड की टिक कुछ ज्यादा लम्बी लगेगी

आइंस्टीन के General Relativity अनुसार -

आइंस्टीन के General Relativity के सिध्धांत के मुताबिक किसी भी तरह के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र में समय की रफ़्तार कम हो जाती हैं. जैसे समय की गति हमारी पृथ्वी पर अंतरिक्ष की तुलना में कम होगी. जैसे की किसी ब्लैक होल के नजदीक गुरुत्वाकर्षण बहुत तीव्र हो जाता हैं. ऐसी जगह पर समय की रफ़्तार बहुत ही कम हो जाती हैं. तीव्र गुरुत्वाकर्षण की वजह से space-time में कई विकृतियाँ पैदा हो जाती हैं. ऐसी विकृतियों से worm holes पैदा हो सकते हैं, जो की space-time में सफ़र करने के लिए शार्टकट हो सकते हैं. कुछ वैज्ञानिक तो ऐसा ही मानते हैं. जो भी हो मेरा तो यहीं मानना हैं की समय यात्रा सिर्फ भविष्य की ही मुमकिन हो सकती हैं. क्योंकि समय में पीछे जाना मुमकिन ही नहीं हैं. क्योंकि जो हो गया वह हम कभी बदल नहीं सकते लेकिन जो होनेवाला हैं वह अभी भी हाथ में हैं. हम शायद भविष्य की सैर कर सकते हैं लेकिन उसके लिए हमे बहुत ही उम्दा टेक्नोलॉजी की जरुरत होगी और बहुत ज्यादा उर्जा की भी जरुरत होगी.
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