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शनिवार, 17 सितंबर 2016

सम्मोहन आकर्षण क्या होता है -What is the attraction hypnosis -

 Irfan point     आध्यात्मिक-विज्ञानं, रोचक जानकारी   

Low of Attraction (आकर्षण का सिद्धांत) की बात करते हैं. पॉजिटिव सोच और एहसानमंद रहना. इसके मुताबिक आप अपने दिमाग में जो सोचते हैं और जिन चीजों की छवियाँ रखते हैं, वो ही चीज़े आपके साथ घटित होती हैं. आप जिस चीज़ को चाहते हैं उसको पा सकते है. वैसे इस चीज़ को मैं भी मानता हूँ. इसलिए नहीं की मैंने इसे फिल्म में देखा हैं, बल्कि इसलिए क्योंकि मेरे अब तक के जीवन में मैंने हर पल इसे महसूस किया हैं. लेकिन विज्ञान इसके बारे में क्या कहता हैं? तो आइये जानते हैं इस आकर्षण के सिद्धांत के पीछे का विज्ञान. Science of The Law of Attraction in Hindi-
सम्मोहन आकर्षण क्या होता है -What is the attraction hypnosis -


अध्यात्मवादीयों का एक पुराना विचार हैं की आप अपने जीवन को जिस तरह देखेंगे और महसूस करेंगे उसका आउटपुट भी बिलकुल वैसा ही होंगा. मतलब की जैसा सोचेंगे वैसा ही पाएंगे. गहरे ध्यान(Meditation) के माध्यम से, इन प्राचीन अन्वेषकोंने खोज निकाला की कैसे आपकी अन्दर की परिस्थितियां (दिमाग के विचार) आपकी बाहरी परिस्थितियों (आपके द्वारा किए जानेवाले कार्य) को प्रतिबिंबित करती हैं. अगर आपने The Secret फिल्म देखि हो तो आप जानते होंगे की आकर्षण का सिद्धांत एक वैज्ञानिक सिद्धांत हैं. यह सिद्धांत क्वांटम भौतिकी की ओर इशारा करता हैं.

हाल ही में हो रहे मस्तिष्क के इमेजिंग अध्ययन यह दिखा रहे हैं की हमारा दिमाग आकर्षण के सिद्धांत के अनुरूप ही कार्य करता हैं. इसके लिए आज तक का सबसे ठोस सबूत हैं “mirror neurons(मिरर न्यूरॉन्स)”. अर्थात्, जब हम किसी व्यक्ति को उसके किसी कार्य करने के दौरान उसका निरीक्षण करते हैं, तब मस्तिष्क सक्रियण का वो ही पैटर्न उस व्यक्ति को ऐसा करने की अनुमति देता है. वह व्यक्ति अभी जो भी कर रहा हैं उसका प्रतिबिम्ब उसके मस्तिष्क में भी नजर आता है. वह बिलकुल वैसी ही छवियाँ होंगी जो पर्यवेक्षक अभी कर रहा हैं. सक्रियण मस्तिष्क के premotor cortex और parietal cortex में देखा जा सकता हैं. आपका शरीर वोही करता हैं जो आपके दिमाग में होता हैं. आप प्लेसिबो असर के बारे में तो जानते ही होंगे. आपके बीमार होने के बावजूद आपका यह सोचना की आप एकदम ठीक हैं, आपकी बीमारी दूर कर सकता हैं.

उस पल के बारे में सोचिए जब आप किसी हाई स्पीड कार चसिंग द्रश्य को देखते हैं. आपको यह देखना कितना अच्छा लगता हैं. आप रोमांचित हो जाते हैं. आप शायद नहीं जानते होंगे, लेकिन उस द्रश्य को देखने के दौरान आपका दिमाग उस द्रश्य के एकदम अनुरूप सिम्युलेशन बनाता हैं, और आप को ऐसा लगता हैं की आप खुद वहीँ चीज़े कर रहे हैं. कई बार तो आप किसी इंटेंस द्रश्य को देखने पर कुछ ज्यादा ही प्रतिक्रिया कर देते हैं और द्रश्य के मुताबिक अपने हाथ-पैर हिलाने लगते हैं. इन सभी विचारों के लिए एक अंतर्निहित कनेक्शन की धारणा है – हम सब एकदूसरे अन्दर से और बाहर से जुड़े हुए हैं.

हम आगे देख चुके हैं की कैसे अवलोकन वास्तविकता को प्रभावित करता हैं. आप जिस तरह पदार्थ और ऊर्जा का निरीक्षण करते हैं, उसी तरह उनके व्यव्हार में परिवर्तन होता हैं. भले ही उसमे आपको कोई फरक न दिखे लेकिन क्वांटम लेवल पर उसमे परिवर्तन होता हैं. क्वांटम भौतिकी का डबल छेदोंवाला प्रयोग इसका सबसे अच्छा उदहारण हैं.

blue stringsहमने आगे हमारी पोस्ट ब्रह्माण्ड और भगवान का सही ज्ञान में यह देखा की ब्रह्माण्ड में सभी चीज़े कंपित हो रही हैं. विज्ञान ने भी अभी अभी यह रियलाइज किया हैं की, ब्रह्माण्ड की हर एक बड़ी से बड़ी और छोटी से छोटी चीज़ के अन्दर उर्जा की छोटी सी स्ट्रिंग्स होती हैं, जो लहर के स्वरुप में लडखडाती हुई अलग अलग पैटर्न में कंपित होती हैं. उर्जा की यही स्ट्रिंग्स न्यूक्लियस के प्रोटॉन और न्यूट्रॉन को बनाती हैं. (वैज्ञानिकों ने इसके एक टुकड़े को क्वार्क नाम दिया. यह स्ट्रिंग्स दो आकर की होती हैं, ‘U’ आकार की और सीधी रेखा के आकर की. ‘U’ आकर की स्ट्रिंग से सजीवों के कोष बनते हैं.) जब आपके दिमाग में विचार प्रकट होता हैं तब सीधी रेखा के आकार की स्ट्रिंग उनके बिच के आकर्षण(Electro Magnetic Field) की वजह से खुद को कई बार मोड़ देती हैं और ‘U’ आकार की बन जाती हैं. जब आपका विचार ज्यादा पावरफुल और सकारात्मक होता हैं तो उसकी स्ट्रिंग्स के बिच का आकर्षण भी ज्यादा पावरफुल होंगा, जिससे उसके अनुरूप ज्यादा स्ट्रिंग्स आकर्षित होंगी और भौतिकता पैदा करेंगी. मतलब की आपके दिमाग से निकला विचार बाहर निकल कर उसको भौतिक स्वरूप देने के लिए सक्षम हैं. आपका विचार एक ऐसा बल हैं जो क्वांटम लेवल पर उसके अनुरूप परिस्थितियों को आकर्षित कर सकता हैं. जो हम कई बार हमारे रोज के जीवन में अनुभव करते हैं.

आपके शरीर के अन्दर की यह स्ट्रिंग्स कम्पित होती हैं. मतलब की आप इस वक़्त कम्पित हो रहे हैं. आपके विचार जिस फ्रीक्वन्सी पर कम्पित होते हैं उसी फ्रीक्वन्सी पर आपका शरीर कम्पित होता हैं. मतलब की पूरे ब्रह्माण्ड में एक ही कम्पन मौजूद हैं, लेकिन अलग अलग फ्रीक्वन्सी पर. आकर्षण के सिद्धांत के मुताबिक यह बात आप पर निर्भर करती हैं की आप कौन से फ्रीक्वन्सी पर वाइब्रेट हो रहे हैं. आप किस विषय के लिए वाइब्रेट हो रहे हैं? ब्रह्माण्ड हिंदी या अंग्रजी भाषा नहीं समजता हैं. वह केवल कंपन की भाषा समजता हैं. अगर आप हताशा की भावना के साथ कहते हैं की “मुझे बहुत सारे पैसे चाहिए?” ब्रह्माण्ड में यह सन्देश कुछ इस तरह से जाएंगा, “मुझे हताश होने के लिए बहुत सारे पैसे चाहिए.” और इसका परिणाम बहुत ही बुरा होंगा. तो अपने पैसे ख़ुशी के साथ मांगीए. पूरे ब्रह्माण्ड का अस्तित्व आपसे ही हैं. अगर आप यह प्रश्न करते हैं की ब्रह्माण्ड का अस्तित्व क्यों हैं, इसके लिए जरुरी हैं उसका अस्तित्व परिभाषित करने के लिए किसी प्रेक्षक का अस्तित्व होना. किसी चेतन वस्तु के बिना तो उसके होते हुए भी उसका कोई वजूद नहीं होंगा. चेतना और ब्रह्माण्ड मौलिक रूप से परस्पर हैं. यह दोनों एक साथ न हो तो आप दोनों में से किसी एक को नहीं समज सकते हैं. एक प्रेक्षक ही ब्रह्माण्ड का सर्जन करता हैं. आपकी चेतना ही आपके द्वारा किए गए कार्य के माध्यम से बाहर की दुनिया को प्रभावित करती हैं.

ज्यादा पावरफुल और सकारात्मक विचार ज्यादा बड़ा आकर्षण का क्षेत्र पैदा करते हैं. इस क्षेत्र या बल को आप अपने दिल में महसूस करत सकते हैं. सोचिए जब आप ज्यादा इमोशनल होते हैं या किसी को बहुत ही ज्यादा याद कर के रोते हैं तो आप वह दर्द दिल में महसूस करते हैं. मतलब की हमारा दिल उससे कई ज्यादा रहस्यमयी हैं, जितना हम उसे जानते हैं. महसूस होनेवाली वह फीलिंग या क्षेत्र इतना पावरफुल हैं जिसके बारे में आप सोच भी नहीं सकते. केवल आप ही उसके अन्दर के बल, इच्छाओ और फ्रीक्वन्सीओं को महसूस कर सकते हैं. हम माने या ना माने लेकिन हमारा दिल हमारे दिमाग से जुडा हुआ हैं. शायद इसीलिए क्रिस्टोफ़र नोलन ने अपनी फिल्म INTERSTELLAR में LOVE(प्रेम) को सबसे ज्यादा पावरफुल बल दिखाया हैं.

लेकिन, यह सब तो हुई साइंस फ्रिक्शन की बातें. एक सीधी बात तो यह हैं की अगर आप किसी कार्य करते वक़्त नकारात्मक होंगे तो कार्य में सफल नहीं हो पाएंगे, क्योंकि आप अपना पूरा कंसंट्रेशन उसमे नहीं लगा पाएंगे. The Law of Attraction भी यहीं कहता हैं, हमेशां सकारात्मक रहिये. नकारात्मक विचार आपको कमजोर करता हैं इस बात को प्रूव करने की जरुरत नहीं हैं. हम हमेशा यह महसूस करते हैं. विज्ञान इसे सच साबित कर पाए या ना कर पाए, लेकिन एक बात तो स्पष्ट है की इससे कभी कोई नुकसान नहीं हो सकता हैं. बल्कि इससे दुनिया में सकारात्मकता, प्यार और भाईचारा ही बढ़ता हैं.

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शुक्रवार, 16 सितंबर 2016

क्या अग्नि को तेज इश्वर से मिला है ?-Fire of God has intensified -

 Irfan point     आध्यात्मिक-विज्ञानं, ये भी जाने, विज्ञानं, सामान्य विज्ञानं   

आग क्या होती है --

आग एक ठोस चीज़ की तरह दिखती है, लेकिन यह नहीं. यह वास्तव में सिर्फ वाष्प है. आग दहन(combustion) नामक एक रासायनिक प्रतिक्रिया का परिणाम होती हैं. दहन प्रतिक्रिया में एक निश्चित बिंदु पर आग की लपटें उत्पन्न होती हैं. इस बिन्दु को इग्निशन बिंदु(ignition point) कहा जाता है. आग की लपटें में मुख्य रूप से कार्बन डाइऑक्साइड, जल वाष्प, ऑक्सीजन और नाइट्रोजन से मिलकर बनती है. आग गर्मी और प्रकाश का उत्सर्जन करती है. आग उत्पन्न करने के लिए इन तीन चीजों का होना बहुत जरुरी हैं : ईंधन, ऑक्सीजन और उर्जा.
अग्नि को तेज इश्वर से मिला है ?-Fire of God has intensified -

आग गर्म क्यों होती हैं ?

आग गर्म होती हैं क्योंकि, दहन की प्रक्रिया के दौरान इंधन पदार्थ के रासायनिक बांड्स टूटते हैं और बनते हैं. इसकी वजह से थर्मल एनर्जी उत्पन्न होती हैं. दहन के दौरान इंधन और ऑक्सीजन का कार्बन डाइऑक्साइड और पानी में रूपांतरण होता हैं. इस प्रक्रिया को शुरू करने के लिए उर्जा की जरुरत होती हैं जिससे इंधन और ऑक्सीजन के परमाणुओं के बिच के बांड्स टूटते हैं. लेकिन इसमें ज्यादा उर्जा तब रिलीज़ होती हैं जब यह रासायनिक बांड्स कार्बन डाइऑक्साइड और पानी के स्वरुप को धारण करते हैं. इसमें धुएं  के स्वरुप में कुछ अस्थिर गैसें बाहर निकलती हैं. यह धुआं ज्यादातर हाइड्रोजन, कार्बन और ऑक्सीजन से बना होता हैं.
ईंधन + ऑक्सीजन + ऊर्जा → कार्बन डाइऑक्साइड + पानी + अधिक ऊर्जा

 अगर लकड़ी के दहन के दौरान अस्थिर गैसें पर्याप्त गर्मी(260 degrees C) प्राप्त कर लेती हैं तब उसके अणु टूट जाते हैं और उसके परमाणु ऑक्सीजन के साथ पानी, कार्बन डाइऑक्साइड और अधिक ऊर्जा के स्वरुप को धारण करने के लिए फिर से जुड़ते हैं. दूसरे शब्दों मई कहे तो वे जलते हैं. दहन के दौरान प्रकाश और गर्मी रिलीज़ होते है. लपटें उर्जा की मौजूदगी का सबूत होती हैं. लपटें ज्यादातर गर्म गैसों से मिलकर बनती है. आग का प्रकाश दहन प्रतिक्रिया का एक दृश्य संकेत है, लेकिन तापीय ऊर्जा (गर्मी) अदृश्य हो सकती है. इससे प्रकाश उत्पन्न होता हैं क्योंकि, पदार्थ गरमागरम प्रकाश का उत्सर्जन करने के लिए पर्याप्त गर्म हो चूका होता हैं. आग की लपटें आयनीकृत गैसों से प्रकाश का उत्सर्जन करती हैं जिसकी वजह से एक चमक दिखती हैं. अगर लपटें पर्याप्त रूप से गर्म हो जाती हैं तो उसके अन्दर के वायु आयनित हो जाते हैं और आग का नया स्वरुप मिलता हैं : प्लाज्मा.

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जीवन क्या होता है गुप्त राज --What is the secret of life-

 Irfan point     आध्यात्मिक-विज्ञानं   

स्व जागरूकता(Self-awareness) का मतलब होता हैं किसी एक को उसकी भावनाए, विशेषताए और उसके अस्तित्व के बारे में पता होना और इन सब का मतलब समजने के लिए उसका सक्षम होना. चेतना को सीधी भाषा में समजे तो उसका मतलब होता हैं किसी भी पैटर्न्स को समज लेना और उसे अपने साथ होती घटनाओं से जोड़ना. चेतना सारी सृष्टि में प्रेरणादायक और सृष्टि को चलनेवाली एक क्षमता है. चेतना के होने के लिए उसके कारण का होना जरुरी हैं. हमारी चेतना हमारे लिए इस दुनिया को अवलोकन करने योग्य प्रभाव पैदा करती हैं.-चेतना क्या हैं? What Is Consciousness? In Hindi
जीवन क्या होता है गुप्त राज --What is the secret of life-

जीवत होने की क्या पहचान है --

चेतना का सीधा संबंध दिमाग के साथ होता हैं. तो दिमाग में आखिर चेतना आती कहाँ से हैं? इस सवाल का जवाब वैज्ञानिक आज भी ढूँढने में असमर्थ है. ज्यादातर वैज्ञानिको का मानना हैं की चेतना दिमाग के अन्दर होती केमिकल प्रोसेसो का नतीजा होती हैं. तो फिर क्या छोटे ताजे जन्मे बच्चे चेतन होते हैं? इसका जवाब हैं हा. क्योंकि छोटे बच्चे भी घटनाओं पर प्रतिक्रियाएं करते हैं. जैसे की भूख लगने पर रोना. चेतना समय के साथ साथ शरीर के विकास के साथ बढती हैं. जानवरों में भी चेतना होती हैं लेकिन हम मनुष्यों के अन्दर की चेतना की तरह नहीं. हम नहीं जानते की जानवर सोच सकते हैं या नहीं. हम इन्सान किसी भी चीज़ या घटना के सामने सोचकर उसके सामने सकारात्मक प्रतिक्रिया करते हैं. सबसे बड़ी बात यह हैं की हम इन्सान चीजों को याद रख सकते हैं और उन यादो का उपयोग आगे होनेवाली घटनाओं से निपटने के लिए करते हैं.

कोई इन्सान अभी जीवित हैं तो क्यों है -

 इसलिए की अपने आप को चेतन महसूस कर रहा हैं. क्या होगा अगर उसकी मृत्यु हो जाये? उसकी मृत्यु के बाद उसकी चेतना का क्या होगा? क्या उसकी मौत के बाद उसकी चेतना अस्तित्व में रहती हैं या उसके शरीर के साथ ख़तम हो जाती हैं? दुनियाभर के ज्यादातर लोगो के लिए सबसे बड़ा सवाल यहीं होता हैं. लेकिन इस सवाल का जवाब पाना नामुमकिन हैं. क्योंकि मरे हुए इन्सान कभी वापस नहीं आ सकते. लेकिन इस सवाल का जवाब इतना आसान भी नहीं हैं. क्योंकि हम जानते हैं हैं की हमारी यादे और विचार एक तरह की उर्जा ही होते हैं. ब्रह्माण्ड में हर एक चीज़ उर्जा हैं और हम जानते हैं की उर्जा को ना बनाया जा सकता हैं और ना ही नष्ट किया जा सकता हैं (Energy Can Neither Be Created Nor Destroyed).
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