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बुधवार, 19 अक्टूबर 2016

जानिए तारों की अनोखी दुनिया के बारे में -Learn about the unique world of the stars -

 Rahiskhan     ध्रुव तारा, रोचक जानकारी, विचित्र दुनिया   

आकाश में सूरज, चाँद और तारों की दुनिया बहुत अनोखी है। आपने घर की छत पर जाकर चाँद और तारों को खुशी और आश्चर्य से कभी न कभी जरुर निहारा होगा। गांवों में तो आकाश में जड़े प्रतीत होने वाले तारों को देखने में और भी अधिक आनंद आता है, क्योंकि शहरों की अपेक्षा गांवों में बिजली की रोशनी की चकाचौंध कम होती है और वातावरण भी स्वच्छ एवं शांत होता है। तारों को निहारते-निहारते और उनकी अधिक संख्या को देखकर आप जरुर आश्चर्यचकित हो जाते होंगे। इस बात की पूरी सम्भावना है कि आपनें शहर में कभी भी ऐसा सुंदर दृश्य न देखा होगा!
जानिए तारों की अनोखी दुनिया के बारे में -Learn about the unique world of the stars -

तारों को रोज देखने से आपके मन में कई सवाल उठतें होंगे कि आकाश के ये तारे हमसे कितनी दूर हैं? ये हमेशा चमकते क्यों दिखाई देते हैं? ये कब तक चमकते रहेंगे? क्या इन तारों का जन्म भी होता है? क्या इनकी मृत्यु भी होती है? आकाश में कुल कितनें तारे हैं? क्या हमारा सूर्य भी एक तारा है? यदि हमारा सूर्य भी एक तारा है, तो इन असंख्य तारों की दुनिया में इसका क्या स्थान है? कहाँ हमारा सूर्य बहुत चमकीला है तो कहाँ तारे अपेक्षाकृत मंद दिखाई पड़ते हैं इसके पीछे क्या कारण हैं? मोतियों से जड़े इस गोले (आकाश) के बावजूद अंधेरा क्यों होता है? क्यों तारे टिमटिमाते नजर आते हैं? और कुछ तारे क्यों नही टिमटिमाते दिखाई देते हैं? आदि अनेक प्रश्न आपके जिज्ञासु दिमाग में जरुर उठते होंगे।
क्या आप जानतें हैं कि प्राचीनकाल से ही मानव तारों से संबंधित उपरोक्त प्रश्नों के उत्तर पाने का प्रयास करता रहा है? इसी का परिणाम है कि आज हमारे पास इन प्रश्नों के सटीक उत्तर उपलब्ध हैं। हम इस आलेख में विस्तार से तारों की इस दुनिया के बारे में चर्चा करेंगें।
कितने दूर हैं तारे?
सूर्य के समीप के तारे
रात के समय आकाश को देखने पर हमें यही प्रतीत होता हैं कि सभी तारे किसी विशाल गोले पर बिखरे हुए हैं और साथ ही साथ हमें यह भी लगता है कि सभी तारे हमसे एकसमान दूरी पर स्थित हैं। इस गोले को प्राचीन भारतीय खगोल-विज्ञानियों तथा यूनानी ज्योतिषियों ने ‘नक्षत्र-लोक’ नाम दिया था। इसी अनुमान के आधार पर अमीर खुसरो ने इस पहेली की भी रचना की थी -‘एक थाल मोती भरा, सबके सिर पर औंधा पड़ा!’ इस पहेली को आप और हम कई बार हल कर चुकें हैं। आज हम जानते हैं कि उनका यह अनुमान सही नहीं था, क्योंकि न तो सभी तारे एकसमान दूरी पर स्थित हैं और न ही कोई ऐसा गोल है जिस पर ये टिके हुए हैं।
हाँ, कुछ तारे हमसे बहुत दूर हैं तो कुछ तारे हमसे बहुत नजदीक। पृथ्वी से तारों  की दूरियाँ इतनी अधिक होती हैं कि हम उसे किलोमीटर या अन्य सामान्य इकाइयों  में व्यक्त नही कर सकते हैं इसलिए हमें एक विशेष पैमाना निर्धारित करना पड़ा जिसे वैज्ञानिक प्रकाश वर्ष कहतें हैं। दरअसल बात यह है कि प्रकाश की किरणें एक सेकेंड में लगभग तीन लाख किलोमीटर की दूरी तय करती हैं। इस वेग से प्रकाश-किरणें एक वर्ष में जितनी दूरी तय करती हैं, उसे एक प्रकाश वर्ष कहते हैं। इसलिए एक प्रकाश वर्ष 94 खरब, 60 अरब, 52 करोड़, 84 लाख, 5 हजार किलोमीटर के बराबर होता है।
सूर्य के बाद हमसे सर्वाधिक नजदीकी तारा प्रौक्सिमा-सेंटौरी हैं, जिसकी दूरी लगभग 4.3 प्रकाश वर्ष है। प्रकाश वर्ष हमें समय और दूरी दोनों की सूचना देता है, हम यह भी कह सकते हैं कि प्रौक्सिमा-सेंटौरी से प्रकाश को पृथ्वी तक पहुँचने में 4.3 प्रकाश वर्ष लगेंगे। आकाश का सबसे चमकीला तारा लुब्धक या व्याध हमसे तकरीबन 9 प्रकाश वर्ष दूर है। तारों  की दूरियां मापने के लिये एक और पैमाने का इस्तेमाल होता है, जिसे पारसेक कहते हैं। एक पारसेक 3.26 प्रकाश-वर्षों के बराबर है।
सूर्य हमसे लगभग 8 मिनट और 18 प्रकाश सेकेंड दूर है। सूर्य और पृथ्वी के बीच की इस दूरी को ‘खगोलीय इकाई’ या ‘खगोलीय एकक’ कहते हैं। हमारी दृष्टि में सूर्य अन्य तारों की तुलना में अधिक बड़ा तथा प्रकाशमान प्रतीत होता है, परन्तु विशाल ब्रह्मांड की दृष्टि में यह महासागर के एक बूंद के बराबर भी नही है। इसलिए हमारा सूर्य आकाश का एक सामान्य तारा है। वास्तविकता तो यह है कि अन्य तारों की अपेक्षा सूर्य पृथ्वी के अधिक नजदीक है इसलिए हमें यह अधिक प्रकाशमान तथा शक्तिशाली प्रतीत होता है।
तारों के रंग एवं तापमान
तारों का तापमान तथा रंग
क्या आप जानते हैं कि सभी तारे एक ही रंग के नहीं होते? पृथ्वी से देखने पर हमे ज्यादातर तारे एक ही जैसे दिखाई देते हैं। मगर, जब हम तारों को दूरबीन से देखतें हैं तो यह साफ हो जाता है कि उनके रंग अलग-अलग हैं। क्या आपको मालूम है कि रंगों से हमें तारों के तापमान के बारे में भी पता चलता है। तथा अलग-अलग तापमान होने के ही कारण दूरबीन से देखने पर तारे अलग-अलग रंग के दिखाई देते हैं। जब किसी लोहे की छड़ी को हम आग में गर्म करते हैं तो ताप और रंग के बीच
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मरने के बाद भी जिन्दा हो जाते है इस मंदिर में -In this temple of the dead become alive -

 Rahiskhan     यूनिवर्स रहस्य, रोचक जानकारी, विचित्र दुनिया   


एक मन्दिर जहां मरा हुआ भी हो जाता है जिन्दा-
मरने के बाद भी जिन्दा हो जाते है इस मंदिर में -In this temple of the dead become alive -
नई दिल्ली। हमारे देश में कई चमत्कारिक और रहस्यमयी मंदिर है, जहां लोगों की बड़ी से बड़ी समस्याओं का हल चुटकियों में हो जाता है। कई मंदिर तो इतने चमत्कारी हंै कि लोग दूर-दूर से यहां मनौती मांगने आते हैं। कहते हैं कि इन मंदिरों में सच्चे मन से की गई प्रार्थना जरूर पूरी होती है। ऐसा ही एक चमत्कारिक और रहस्यमयी मंदिर है जहां किसी व्यक्ति के शव को लेकर जाया जाए तो उसकी आत्मा उस शव में पुन: प्रवेश कर जाती है और वह इंसान जीवित हो उठता है।
खुदाई में मिले हजारों शिवलिंग-
प्रकृति की वादियों में बसा यह गांव देहरादून से 128 किलोमीटर की दूरी पर स्थित लाखामंडल नामक स्थान पर है। यह मंदिर यमुना नदी की तट पर बर्नीगाड़ नामक जगह से सिर्फ 4-5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। समुद्र तल से इस स्थान की ऊंचाई लगभग 1372 मीटर है। दिल को लुभाने वाली यह जगह गुफाओं और भगवान शिव के मंदिर के प्राचीन अवशेषों से घिरा हुआ है। यहां पर खुदाई करते वक्त विभिन्न आकार के और विभिन्न ऐतिहासिक काल के हजारों शिवलिंग मिले हैं।
युधिष्ठिर ने स्थापित किया था शिवलिंग-
माना जाता है कि महाभारत काल में पांडवों को जीवित आग में भस्म करने के लिए उनके चचेरे भाई कौरवों ने यहीं लाक्षागृह का निर्माण करवाया था। ऐसी मान्यता है कि अज्ञातवास के दौरान इस स्थान पर स्वयं युधिष्ठिर ने शिवलिंग को स्थापित किया था। इस शिवलिंग को आज भी महामंडेश्वर नाम से जाना जाता है। जहां युधिष्ठिर ने शिवलिंग स्थापित किया था वहां एक बहुत खूबसूरत मंदिर बनाया गया था। शिवलिंग के ठीक सामने दो द्वारपाल पश्चिम की तरफ मुंह करके खड़े हुए दिखते हैं।

जीवित होते ही लेता है भगवान का नाम-
ऐसी मान्यता है कि मंदिर में अगर किसी शव को इन द्वारपालों के सामने रखकर मंदिर के पुजारी उस पर पवित्र जल छिड़कें तो वह मृत व्यक्ति कुछ समय के लिए पुन: जीवित हो उठता है। जीवित होने के बाद वह भगवान का नाम लेता है और उसे गंगाजल प्रदान किया जाता है। गंगाजल ग्रहण करते ही उसकी आत्मा फिर से शरीर त्यागकर चली जाती है।
बना हुआ है रहस्य
लेकिन इस बात का रहस्य क्या है यह आज तक कोई नहीं जान पाया। इस मंदिर के पीछे दो द्वारपाल स्थित हैं, जिनमें से एक का हाथ कटा हुआ है। अब ऐसा क्यों हैं यह बात आज तक एक रहस्य ही बना हुआ है।
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बुधवार, 28 सितंबर 2016

हमे सपने दिखाई देने का क्या कारण है -This is what we dream of seeing -

 Irfan point     रोचक जानकारी, विचित्र दुनिया   

हमें सपने क्यों दिखाईं देते हैं? Why Do We Dream? हमारे दिमाग में ऐसा क्या चल रहा होता हैं की हमें सपने दिखाई देते हैं? वैज्ञानिक तौर पर सपनों पर होनेवाले अध्ययनों को Oneirology कहाँ जाता हैं. लेकिन हमारे ज्यादातर इतिहास में Oneirology का वजूद नहीं रहा हैं क्योंकि आप किसी सपनें को रोक नहीं सकते और ना ही उसे माप सकते हैं. ना हीं आप सपनों को चख सकते हैं और ना ही दूसरे लोगो के सपनों को देख सकते हैं.

हमे सपने दिखाई देने का क्या कारण है -This is what we dream of seeing -


अगर आप उन लोगों को पूछेंगे की उन्होंने कैसा सपना देखा तो परिणाम अधिकतर हमेशा अविश्वसनीय होंगे. यह अनुमान लगाया गया हैं की जो भी सपने हम देखते हैं उसमे से 95% सपने भूल जाते हैं और वो भी ज्यादातर उन्हें देखने के 10 मिनट के अन्दर ही. लेकिन सन 1952 में शिकागो विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओंने इंसान के दिमाग में उसके सोने के दौरान एक अनूठे प्रकार की इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी देखी. ऐसी अवस्था से उनको जगाया गया तब उन्होंने ज्यादातर यहीं कहा की वे सपना देख रहे थे. और इसी वक्त के दौरान लोगो की आँखे बंद होने के बावजूद इनके नीचें के नेत्रगोलक(Eyeballs) इधर-उधर हिल रहे थे. तो अगर सोने के दौरान आपके किसी दोस्त या किसी फॅमिली मेम्बर की आंखे भी इस तरह बंद होने के बावजूद हिल रही हैं तो समज लीजिए की वे अभी सपना देख रहे हैं.

sleep paralysis
REM (Rapid eye movement) नींद के दौरान कुछ विचित्र चीजे होती हैं. इस दौरान अगर दिमाग की इलेक्ट्रिकल एक्टिविटीओं पर नजर डालेंगे तो वो बिलकुल उसी तरह की होंगी जैसी वे इन्सान के जगने के दौरान होती हैं. मस्तिष्क के अंदर norepinephrine, सेरोटोनिन और हिस्टामिन जैसे रसायनों के उत्पादन पूरी तरह से ब्लॉक हो जाते हैं और वो ही मांसपेशीओं के ना हिल पाने का कारण बनते हैं. इस वजह से आप उड़ने का, दौड़ने का या फाइट करने का सपना देखते हैं लेकिन वास्तव में आपका शरीर हिल नहीं रहा होता हैं. जिन लोगो में REM-A-Topia को पूरी तरह से अचीव नहीं कर पाने का विकार होता हैं वो नींद के दौरान इधर-उधर हिलते हैं और अपने सपनें को वे खुद परफॉर्म करते हैं. कई बार तो अपने बिस्तर से निचे उतर कर चलने लगते हैं. कई बार हो सकता हैं की आप नींद से उठ गए हो लेकिन अपने शरीर को हिलाने के लिए सक्षम न हो पाए. आप जानते हैं की आप पूरी तरह से सजाग हैं लेकिन आपका शरीर हिलने के लिए तैयार नहीं हैं. क्योंकि अभी भी आप REM-A-Topia में होते हैं. कई बार आप सपने में होते हैं और जानते भी हैं की आप सपना देख रहे हैं. इस घटना को Lucid Dreaming कहते हैं. इस तरह की घटना के बारे में कमाल की बात यह हैं की आप अपने सपने के लिए कुछ भी सचेत निर्णय ले सकते हैं. में जहाँ चाहू वहाँ उड़ सकता हूँ या शाहरुख़ खान के साथ डिनर कर सकता हूँ. आप जो करना चाहे वो कर सकते हैं.


अगर एक व्यक्ति पूरे दिन के दौरान कोई मुश्किल नया काम सीखता है, जैसे की कोई नया उपकरण चलाना या कोई सवाल का जवाब, तब आप उनके दिमाग में चल रही इलेक्ट्रिकल एक्टिविटीओं को माप सकते हैं. जब उस रात को ऐसे लोग सो जाते हैं तब वे जाने या न जाने, उनका दिमाग उन इलेक्ट्रिकल एक्टिविटीओं का रीप्ले करता हैं. हम सपने क्यों देखते  हैं इसके बारे में सबसे लोकप्रिय सिध्धांत यह हैं की जब हम सोते हैं तब हमारे दिमाग का अचेतन हिस्सा हमारे दिमाग में स्टोर यादों का आयोजन करता हैं.


लेकिन सपनोँ के बारे में जानने से मजेदार हैं उन्हें देखना. सामने की तरफ तस्वीर में ईगल नेबुला हैं. यह बाह्य अंतरिक्ष की एक विशाल संरचना हैं. यह हमारे सौरमंडल से 6,500 प्रकाशवर्ष दूर हैं. हम जानते हैं की यह किस चीज़ से बना हैं और एक लाख अरब किलोमीटर लंबा हैं. हम यह भी जानते हैं की यह वहाँ पर किस कारण से हैं और 750 मिलियन सालों से वहाँ पर हैं. लेकिन पिछली रात यह मेरे सपने में आया. क्या स्पेशल इफ़ेक्ट था. मानों में खुद एक अवकाशयान हूँ और अंतरिक्ष में खुला लहरा रहा हूँ. इसके बाद ईगल नेबुला मेरे सामने था. कोई नहीं जानता क्यों? यहीं तो सपनों की खूबी हैं.
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सोमवार, 19 सितंबर 2016

ये कीड़े मकोड़े की अजीब दुनिया, इस में समय भी धीमा हो जाता है --The strange world of insects, it also slows down the time -

 Irfan point     जीवन-विज्ञानं, ये भी जाने, रोचक जानकारी, विचित्र दुनिया   

मक्खी या छोटे जानवरों (Small Animals) की रफ़्तार को तो आप जानते ही होंगे. वे हमसे बहुत तेज होते हैं. ऐसा इसलिए है क्योंकि मक्खियों की प्रक्रिया मनुष्य की तुलना में चार गुना अधिक दृश्य जानकारी के साथ होती हैं. मक्खियाँ अपने आसपास की दुनिया को प्रति सेकंड 250 फ्रेम में देखती हैं या Perceive करती हैं, जब की हम इन्सान केवल प्रति सेकंड 60 फ्रेम में देखते हैं. इसलिए ज्यादातर वह आप के हाथ में आने से बच जाती हैं. क्योंकि ऐसे छोटे जानवर दुनिया को स्लो-मोशन में देखते या महसूस करते हैं. Small Animals Live in a Slow-Motion World in hindi.
ये कीड़े मकोड़े की अजीब दुनिया, इस में समय भी धीमा हो जाता है --The strange world of insects, it also slows down the time -

एक इंसानी सेकंड अन्य जीवों की तुलना में
कुत्ते का एक साल इंसानों के सात सालों के बराबर होता हैं. तो क्या इसका मतलब यह हैं की हमारा एक साल कुत्ते को सात सालों जितना महसूस होता हैं? एक सबूत से यह पता चला हैं की, अलग अलग प्रजातियों के जानवरों को उनके जीवन का समय गुजरने का अनुभव अलग अलग पैमाने पर होता हैं. पशु व्यवहार से सम्बंधित एक ताजा अध्ययन में पता चला है कि जानवरों के शरीर का द्रव्यमान और चयापचय का दर निर्धारित करता हैं की समय को वे कैसे महसूस करते हैं. समय की अनुभूति इस बात पर निर्भर करती हैं की कितनी तेजी से जानवर का तंत्रिका तंत्र संवेदी जानकारी को संसाधित करता है. इस क्षमता का परीक्षण करने के लिए, शोधकर्ताओंने कुछ लोगों को एक तेजी से चमकती रोशनी दिखाई. अगर रोशनी पर्याप्त तेजी से चमकती हैं तो उनको वह स्थिर दिखाई देंगी. वह फ़्लैश तो हो रही होती हैं लेकिन हम इंसानों को स्थिर दिखाई देती हैं. इसके बाद ऐसी रोशनी को अलग अलग जानवरों को दिखाया गया और उनके व्यवहार या उनके मस्तिष्क की गतिविधियों को इलेक्ट्रोड से मापा गया (इस इलेक्ट्रोड की मदद से सर्वोच्च आवृत्ति का पता चलता है). जो जानवर इस इन आवृत्तियों पर भी रोशनी को टिमटिमाती हुई देखते हैं, वे समय को एक स्पष्ट रेजोल्यूशन में देखते हैं. दूसरे शब्दों में कहे तो, हमारे द्वारा अनुभव कियें जानेवाले मूवमेंट और घटनाए ऐसे जानवरों को बहुत ही धीरे से होते दिखाई देते हैं. बिलकुल वैसे ही जैसे किसी फिल्म में बन्दूक की गोली स्लो-मोशन में निकलती हैं. आपने किसी छिपकली को तेजी से कीड़ों को खाते तो देखा ही होंगा.


समय की अनुभूति आपके लिए हमेशा एक जैसी नहीं होती हैं, जब तक की आप अपने शरीर को कोई मूवमेंट न दे. आप शरीर को जितनी तेज मूवमेंट कराएँगे उतना ही समय आपको धीरे धीरे बितता महसूस होंगा. उदहारण के लिए सोचिये की आप अपने हैडफ़ोन में कोई गाना सुन रहे हैं, फिर आप अचानक ही 5 मिनिट के लिए तेज दौड़कर आते हैं या जोगिंग कर के आते हैं, उसके बाद जब आप वह गाना सुनेंगे तब आपको वह गाना थोडा स्लो-मोशन में सुनाई देंगा. ऐसा क्यों? ऐसा इसलिए की आपके तेज दौड़ने से आपके शरीर में खून के बहने की गति बढ़ जाती हैं और दिल तेज धड़क रहा होता हैं. समय की रफ़्तार आपके लिए धीमी नहीं होंगी लेकिन सामान्य इन्सान के मुकाबले आपका दिमाग थोडा तेज मूवमेंट कर रहा होता हैं. दिमाग रक्त बहाव तेज होने से आप दुनिया को कुछ पल के लिए स्लो-मोशन में महसूस करेंगे. लेकिन जब आप रात को अपने बिस्तर पर सोते वक़्त गाना सुनेंगे तो गाना ज्यादा तेज गति से फ़ास्ट-फॉरवर्ड में सुनाए देंगा. क्योंकि तब बिलकुल निष्क्रिय होंगे. आप मूवमेंट नहीं कर रहे होंगे और आपके शरीर और आपके दिमाग में रक्त प्रवाह कम होगा.

चीटी और मक्खी जैसे कई जानवर समय को एक स्पष्ट रेजोल्यूशन में देखते हैं. वे बहुत हलके होते हैं और उनकी चयापचय की क्रिया बहुत ही तेज होती हैं. इससे आप किसी चूहें और हाथी की समय को महसूस करने की क्षमता के बारे में अंदाजा लगा सकते हैं. कुत्ते इन्सान की तुलना में कम से कम 25 प्रतिशत तेजी से दृश्य जानकारी लेते हैं. समय की अनुभूति, शरीर की संरचना, और शरीर विज्ञान के बीच की कड़ी से यह पता चलता हैं की अलग अलग नर्वस सिस्टम ऊर्जा संरक्षण के साथ प्राकृतिक वातावरण के दबाव को संतुलित करने के लिए विकसित हुई हैं.

मेरे ख्याल से कोई भी चीज़ जितनी भी छोटी होती हैं, समय की रफ़्तार उसके लिए कम होती जाती हैं. आप जैसे जैसे स्केल में निचे उतरते जाएंगे तब आपका एक सेकंड लंबा होता जाएगा. यह हम हमारी पोस्ट एक सेकंड कितना लंबा होता हैं? में देख चुके हैं. इंसानी सेकंड की परिभाषा होती हैं ” एक सीज़ियम परमाणु के भीतर होते 9,19,26,31,770 संक्रमण.” इन संक्रमणों की संख्या भले ही बहुत ज्यादा हैं लेकिन वहाँ उस परमाणु के भीतर वह एक सामान्य बात होंगी. भौतिकता के किसी एक बहुत ही छोटे स्तर पर एक पिकोसेकंड का मूल्य भी एक इंसानी सेकंड जितना हो सकता हैं. मान लीजिए आप अपने हाथ से चुटकी बजाते हैं. उस चुटकी के द्रश्य को अगर आप आपके शरीर के एक परमाणु या उससे भी छोटे कण के नजरिये से देखे तो वह शायद उसके समय के मुताबिक कुछ महीनों या सालों जितना लंबा होंगा.

उसी तरह चीज़ जितनी विशाल होती हैं उसको उससे छोटी चीज़े बहुत ही तेजी से मूवमेंट करती दिखाई देती हैं. यानी की भौतिकता के एक विशाल स्तर पर रही किसी विशाल चीज़ के मुताबिक हमारी पृथ्वी का एक साल उस स्तर के एक सेकंड जितना हो सकता हैं. यानी की उस लेवल का एक सेकंड हमारे एक साल के बराबर होंगा. इस अनंत संसार में हम इंसान किसी एक विशाल चीज़ के लिए एक परमाणु भर हो सकते हैं.

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रविवार, 18 सितंबर 2016

परछाई,छाया का भी वजन होता है-Reflection, shadow-the weight of

 Irfan point     ये भी जाने, रोचक जानकारी, विचित्र दुनिया   

WHAT IS A SHADOW?
पहली बार सुनने पर तो यह एक मूर्खतापूर्ण सवाल लग सकता है. मेरा मतलब परछाई को कभी किसी चीज़ के ऊपर रखकर उसका वजन नहीं मापा जा सकता हैं. लेकिन रौशनी जो हमारे शरीर पर पड़ती हैं, जिसकी वजह से हमारी परछाईं बनती हैं, उसे तोला जा सकता हैं. क्योंकि परछाई अंधकार नहीं हैं, वह रौशनी की कम मात्रा हैं,  हम सब जानते हैं की प्रकाश के अन्दर उर्जा होती हैं. जब प्रकाश किसी चीज़ से टकराता हैं तब वह चीज़ को हल्का सा धक्का भी देता हैं. पृथ्वी की सतह पर जब सूरज की रौशनी टकराती हैं तब हर वर्ग इंच पर एक पाउंड  के एक अरब वे हिस्से जितने बल से धक्का लगता हैं, जो सामान्य रूप से कुछ भी नहीं हैं.

परछाई,छाया का भी वजन होता है-Reflection, shadow-the weight of

शिकागो शहर में जिस दिन धुप निकली हो उस दिन उसका वजन 300 पाउंड ज्यादा होता हैं. इसलिए क्योंकी सूरज की रौशनी उस पर गिर रही हैं, उसे धकेल रही हैं. बाहरी अंतरिक्ष में जहाँ पर सौर हवाएं पृथ्वी के वायुमंडल या चुंबकीय क्षेत्र से फ़िल्टर नहीं होती, वहाँ इसकी मात्रा में बढौतरी मिल सकती हैं. एक अंतरिक्षयान जो पृथ्वी से मंगल की यात्रा कर रहा हैं, उसे वहाँ जाते हुए 1000 किमी तक के रस्ते पर प्रकाश का धक्का लगेगा. इसलिए इन चीजों का मंगल ग्रह की यात्रा करने में सकारात्मक असर होता है.

इसे मापना तो बहुत मुश्किल हैं पर हम कह सकते हैं की जिन क्षेत्रों पर परछाई होती हैं उन क्षेत्रो पर बिना परछाई वाले क्षेत्रों के मुकाबले प्रकाश द्वारा दिया गया धक्का कम होता हैं. इसलिए बिना परछाई वाले क्षेत्रों की तुलना में परछाई वाले क्षेत्रों का वजन कम होता हैं. 3 खगोलीय पिंड जो पृथ्वी की सतह पर छाया डाल सकते हैं जो मनुष्य के देखने के लिए पर्याप्त प्रकाशित होते हैं. एक स्पष्ट रूप से सूर्य है, और दूसरा चन्द्र हैं. लेकिन तीसरे क्या है? तीसरा हैं शुक्र. Pete Lawrence ने रात्रि के आकाश की जांच की और पता लगाया की रात के दौरान परछाईओं के लिए कुछ हिस्सा शुक्र का भी जिम्मेदार होता हैं.

किसी भी चीज़ को प्रकाश का धक्का लगने की गति तत्काल नहीं हैं और निश्चित रूप से वह प्रकाश की गति भी नहीं हैं. लेकिन प्रकाश आप को धक्का दे सकता हैं. यानी उसके पास किसी तरह का बल या वजन हैं. मतलब जब आप पर किसी भी चीज़ की रौशनी गिर रही हैं तो आपका वजन ज्यादा होगा और रौशनी नहीं गिर रही या आप अंधेरे में हैं तो आप का वजन कम हो जाएगा. लेकिन आप उसे मापने के लिए मत बैठ जाना.

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कोई फ़ाइल् मिटने के बाद कहा चली जाती है -After dissolving leaves a file called

 Irfan point     कम्प्यूटर विज्ञान, ये भी जाने, रोचक जानकारी, विचित्र दुनिया   

सोचिये, आपके कंप्यूटर में रहे विडियो, तस्वीरे, सॉफ्टवेर, गेम्स को अचानक ही आप Delete कर देते हैं. तो यह सब स्टफ डिलीट करने के बाद कहाँ जाता होंगा? Where Do Deleted Files Go? डिलीट हो जाने के बाद क्या वह कंप्यूटर या मोबाइल में ही रहता हैं? वह सारी इनफार्मेशन अचानक से गायब तो नहीं सकती. में कई सालों तक इसके बारे में सोचता रहा. लेकिन सबसे पहले इस शब्द के बारे में जानते हैं : Delete. सन 1979 एक महत्वपूर्ण वर्ष था. Ngram दर्शक के अनुसार, यह पहला साल था जब हम Delete शब्द का इस्तेमाल करने लगे, Erase शब्द के बदले में. वैसे हमारे संचार में Forget (भूल जाना) शब्द का उपयोग भी ज्यादा होता हैं. लेकिन कोई कंप्यूटर भूल कैसे सकता हैं? किसी फाइल को कंप्यूटर के Recycle Bin में डालना तो सिर्फ शुरुआत भर होती हैं.डिलीट करने के बाद फाइलें कहाँ जाती हैं? Where Do Deleted Files Go
कोई फ़ाइल् मिटने के बाद कहा चली जाती है -After dissolving leaves a file called


कोई भी फाइल आकस्मिक रूप से डिलीट हो जाए इसके लिए वह पहले कंप्यूटर के Recycle Bin में जाती हैं. वहाँ वह फाइल पूरी तरह से delete नहीं होती बल्कि, Recycle Bin में पड़ी रहती हैं. आप चाहे तो उसको वहाँ से वापस ला सकते हैं. लेकिन जब आप Recycle Bin को खाली करते हैं तो आप को एक बार चेतावनी दी जाती हैं. उसके बाद आपकी फाइल पूरी तरह से डिलीट हो जाती हैं. लेकिन जब आप Recycle Bin को खाली करते हैं तब वह खाली space वास्तव में वह खाली नहीं होता हैं. वह सिर्फ खाली स्वरुप में मार्क किया गया होता हैं. कहीं पर नया डेटा स्टोर करने के लिए यह space उपलब्ध होता हैं. डिलीट की हुई फाइल जिस जगह पर थी उतनी जगह उपलब्ध हो जाती हैं लेकिन डिलीट कर दी हुई फाइल को बाहर नहीं कर दिया होता हैं. केवल उसके पॉइंटर्स दूर चले जाते हैं. पॉइंटर आपकी ड्राइव में एक अलग तरह का डाटा होता हैं जो की किसी कंटेंट के टेबल की तरह होते हैं.

किसी कंप्यूटर का डेटा Recycle Bin में डालकर उसमे से भी डिलीट करने की प्रक्रिया को कुछ इस तरह सोचिए. किसी पुस्तक में से एक चैप्टर को डिलीट करने के लिए उसके किसी पेज की कंटेंट को मोडकर उसको खाली स्वरुप में मार्क करना. इसका मतलब आप जिस सामग्री को ढूंढ रहे हैं वह यहाँ मौजूद नहीं हैं. कंप्यूटर के लिए किसी टेबल को पढ़ते वक्त उसके लिए वह] जगह खाली हैं, लेकिन वास्तव में वह सब कंटेंट वही पर मौजूद हैं. कई तरह के Special data recovery tools मेमोरी के अन्दर देखते हैं और मार्क की हुई जगह को स्कैन कर के यह देखते हैं की वहाँ पर वास्तव में क्या हैं. अगर आपकी किस्मत अच्छी रही तो ऐसे टूल्स आपकी फाइल को ढूंढकर सेव भी कर लेते हैं. लेकिन जिन फाइल्स को पहले से ही ओवरराईट कर दिया गया हो ऐसी फाइल्स currept हो सकती हैं और वहाँ पर प्रॉब्लम हो सकती हैं.

तो आज मेरा यह शक भी दूर हो गया की डिलीट करने के बाद फाइल्स कहाँ जाती हैं. वे कही नहीं जाती बल्कि वही पर होती हैं. केवल उनकी जगह को empty (खाली) मार्क कर दिया जाता हैं और उस जगह पर आप दूसरी फाइल स्टोर कर सकते हैं. लेकिन इससे एक नया सवाल पैदा हो गया. तो यह हार्ड डिस्क कितने GB की हैं? डेटा अगर डिलीट नहीं होता तो हार्ड डिस्क फुल नहीं हो जाएगी? बदकिस्मती से इसका जवाब मेरे पास नहीं हैं. लेकिन जरूर ढूंढ लूँगा. वैसे यह पोस्ट हमारे ब्लॉग के संबंधित तो नहीं था लेकिन सोचने लायक अवश्य था.
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शनिवार, 17 सितंबर 2016

LUCID DREAMING -जब आपको मालूम हो कि सपना देख रहे है --When Do you know you've been dreaming -

 Irfan point     रोचक जानकारी, विचित्र दुनिया   

ल्युसिड ड्रीमिंग का मतलब हैं – ” आपको किसी सपने को देखते वक़्त यह पता होना की आप सपना देख रहे हैं. ” Frederik van Eeden ने पहली बार ‘lucid’ शब्द का अर्थ ‘मानसिक स्पष्टता’ के रूप में इस्तेमाल किया था. इसे वैज्ञानिक रूप से देखे तो,ल्युसिड ड्रीम यानी आपका अपनी नींद चक्र की REM (Rapid Eye Movement) अवस्था के दौरान सपना देखना.Lucid Dreaming In Hindi
LUCID DREAMING -जब आपको मालूम हो कि सपना देख रहे है --When Do you know you've been dreaming -


सब लोग हररोज रात में 3 से 7 सपनें देखते हैं, लेकिन ज्यादातर उन सपनों को भूल जाते हैं. यह ‘मानसिक स्पष्टता’ आमतौर पर इन्ही सपने के दौरान शुरू होती है. जब सपना देखनेवाला एक इन्सान यह महसूस करता हैं की उसको हो रहा अनुभव भौतिक नहीं हैं (सत्य नहीं हैं), बल्कि सपने में घटित रहा हैं. अक्सर सपना देखनेवाले यह नोटिस करते हैं की उनके साथ कुछ असंभव और उनके समज की बाहर का घटित हो रहा हैं, खास कर के उड़ना और मृतकों से मिलना. यह हमें एक ऐसी दुनिया प्रदान करता हैं जो हमारे दिमाग की वास्तविक दुनिया के बाहर की होती हैं.
हम क्यों अनुभव करते हैं ल्युसिड ड्रीम्स?

हालांकि, ल्युसिड ड्रीमिंग की गुणवत्ता में काफी भिन्न प्रकार हो सकते हैं. जब lucidity (स्पष्टता) काफी ऊँचे स्तर पर होती है, तब आप इस बात से अवगत होते हैं की सपनें में जो भी कुछ आप अनुभव कर रहे हैं वह दिमाग में घटित हो रहा हैं, इसलिए आपको कोई भी वास्तविक खतरा नहीं हैं. आप बिस्तर पे सो रहे हैं और शीघ्र ही जाग जाएंगे. EEG (electroencephalogram) का इस्तेमाल कर के ल्युसिड सपना देखनेवाले की ब्रेनवेव्स रिकॉर्ड की गई, और यह पता लगा की ल्युसिड ड्रीम चेतना की एक परिभाष्य और औसत दर्जे के अंतर की हाइब्रिड अवस्था हैं. यह हमे तब महसूस होता हैं जब हमारी चेतना REM (Rapid Eye Movement) अवस्था के दौरान भी जागृत रहती हैं. मतलब की आधी जागृत अवस्था और आधी नींद की अवस्था.

ल्युसिड ड्रीमिंग के दौरान क्या क्या महसूस हो सकता हैं?

LUCID DREAMING ल्यूसिड ड्रीमिंगसबसे पहली चीज़ जो ल्युसिड सपना देखनेवालों को आकर्षित करती हैं, वह हैं उनकी जंगली, साहसिक और नामुमकिन कल्पनाओं की पूर्ती की संभावनाए. कई ल्युसिड सपना देखनेवालों के मुताबिक वे अंतरिक्ष में उड़ सकते थे, सूरज के नजदीक जाकर वहाँ की सैर कर सकते थे, करोडपति बन गए थे और बिना जले आग में नाच रहे थे. बहुत से लोगों का यह कहना हैं कि उनका पहला ल्युसिड सपना उनके जीवन का सबसे अद्भुत अनुभव था. लेकिन यह जरुरी नहीं हैं की ल्युसिड सपनों के दौरान होनेवाले सारे अनुभव आपकी पसंदीदा कल्पनाओं के अनुसार के ही हो. कभी कभी आपको सपनोँ विचित्र और डरावने जानवर और परिस्थितियों का भी सामना करना पड़ सकता हैं.

LUCID DREAMING no sense of time

ल्युसिड सपनों के दौरान आप समय और चीजों को परखने की क्षमता खो देते हैं. उदहारण के लिए अगर आप मानसिक स्पष्टता की इस अवस्था के दौरान अपनी घडी में समय और पुस्तक में लिखे शब्दों को पढने का प्रयत्न करेंगे तब हर बार अलग समय और शब्द पाएंगे. मतलब की पहले आपने जो समय और शब्द देखे थे थोड़ी देर के बाद वह दूसरी बार देखने पर उनमे बहुत ही अंतर होंगा. आप जागृत होने के बावजूद कन्फ्यूज हो जाएंगे.


ल्युसिड ड्रीमिंग के फायदे और नुकसान

समर्थकों का दावा हैं की ल्युसिड सपनें समस्या को सुलझाने के कौशल में सुधार कर सकते हैं, याददाश्त में सुधार और आत्म-विश्वास में बढौतरी ला सकते हैं. रात्री के दौरान आपको अनुभव होनेवाले बुरे सपने की संख्या को कम कर देते हैं और अधिक आरामदायक नींद प्रदान करते हैं. ल्युसिड ड्रीमिंग से होनेवाला अभी तक कोई भी संभावित नुकसान मिला नहीं हैं, लेकिन कुछ लोगो का कहना है की शायद इससे अलग अलग प्रकार की मानसिक बीमारियाँ हो सकती हैं.
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International space station इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन धरती से दूर एक रोचक दुनिया -International Space Station, an interesting world far from Earth

 Irfan point     अन्तरिक्ष विज्ञानं, यूनिवर्स रहस्य, विचित्र दुनिया   

अन्तर्राष्ट्रीय अन्तरिक्ष स्टेशन या केन्द्र बाहरी अन्तरिक्ष में अनुसंधान सुविधा या शोध स्थल है जिसे पृथ्वी की निकटवर्ती कक्षा में स्थापित किया जा रहा है।
कक्षा की ऊंचाई: 400 कि.मी.
अधिकतम गति: 27,600 कि॰/घं॰
कक्षा में गति: 7.66 km/s
लॉन्च दिनांक: 20 नवंबर 1998
लागत: 150 बिलियन USD
International space station (इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन), जिसका बाह्य अंतरिक्ष में उपयोग किया जाता हैं. इस वक़्त उस में रहनेवाले लोग अभी पृथ्वी से सबसे दूर रहनेवाले लोग हैं. उनका पृथ्वी से अंतर निचे की तस्वीर में दिखाया गया हैं…
लेकिन यह अंतर पृथ्वी से चाँद (जहाँ पर अपोलो के अवकाश यात्री गए थे) की दूरी के मुकाबले तो कुछ भी नहीं हैं-


International space station इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन धरती से दूर एक रोचक दुनिया -International Space Station, an interesting world far from Earth

2001 के नवंबर के बाद से अंतरिक्ष में मनुष्य की एक सतत और निर्बाध उपस्थिति रही है. अलग अलग समय पर अलग अलग लोगों की. लेकिन Where is outer space? आखिर बाह्य अंतरिक्ष शुरू कहाँ से होता हैं?

इसका जवाब हैं, बाह्य अंतरिक्ष आपके सिर से लगभग 1 लाख मीटर यानी की 100 किलोमीटर यानी की 62 मील की ऊंचाई से शुरू होता हैं. इस जगह पर वातावरण बहुत ही ज्यादा पतला होता हैं की लिफ्ट प्राप्त करने के लिए एक विमान को इतनी तेज गति से यात्रा करनी पड़ेंगी जितनी उसकी कक्षीय गति होती हैं. यह कक्षीय गति इतनी तेज होती हैं जितनी आप lift के साथ भी प्राप्त नहीं कर सकते हैं. यहाँ तक की गिरते वक़्त भी नहीं…


आप जितनी तेजी से पृथ्वी की तरफ गिरने लगेंगे उतनी ही तेजी से पृथ्वी आप से दूर घूम जाएंगी. वास्तव में यही चीज़ अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन में रहनेवाले अंतरिक्ष यात्री करते हैं. वे गिर रहे हैं. लेकिन यह एक आम धारणा है की की अन्तरिक्ष यात्री अंतरिक्ष में हलके होकर तैरते रहते हैं. क्योंकि वहां पर कोई गुरुत्वाकर्षण नहीं होता हैं. वास्तव में वहां पर बहुत सारा गुरुत्वाकर्षण मौजूद होता हैं. जितना इस वक़्त हम पृथ्वी पर रहकर महसूस कर रहे हैं उतना.

अगर हम एक 3,70,000 मीटर जितनी ऊंचाई वाला टावर बनाते हैं, जहाँ पर अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन की कक्षा होती हैं, और आप उस टावर पर चलना शुरू करेंगे तो क्या होंगा? आप माने या ना माने, आप वहां पर उतनी ऊंचाई पर भी वैसे ही चलेंगे जिस तरह आप अभी अपने घर में चल रहे हैं. चलने की आपकी अंतरिक्ष में गति उतनी ही रहेंगी जितनी आपके घर पर होती हैं. आप ज्यादा फरक महसूस नहीं करेंगे. पृथ्वी जितना ही गुरुत्वाकर्षण वहां पर महसूस करेंगे.

लेकिन तभी अचानक International space station आप के बगल में से बहुत ही तेज सनसनाहट के साथ प्रति घंटे 17,000 मील की तेजी से गुजरेगा. क्योंकि वे हर सेकंड गिर रहे हैं. आप अंदाजा लगा सकते हैं की यह गति कितनी तेज होंगी.

तो अगर आप अबतक यह सोच रहे थे की International space station में मौजूद अवकाशयात्री कक्षा में चारों ओर तैरने लगते हैं क्योंकि वे शून्य गुरुत्वाकर्षण (zero gravity) का सामना कर रहे हैं तो आप गलत थे. यह एक भटका देनेवाला तत्थ्य हैं. वहां पर वे वह Zero-G महसूस कर रहे है, जहाँ “G” मतलब acceleration felt as weight. यानी की वजन के रूप में महसूस होनेवाला त्वरण (acceleration)…. यह “G” हमे दर्द देता हैं. लेकिन यहीं हमे अच्छा लगता हैं. क्योंकि गुरुत्वाकर्षण के सीमित प्रभाव में ही हम सही ढंग से और तंदुरस्ती से विकसित हो सकते हैं.

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शुक्रवार, 16 सितंबर 2016

एलियन, परग्रहवासी होते तो है जरूर -Alien, then there are Prgrhwasi -

 Irfan point     एलियन, विचित्र दुनिया   

Are Aliens And Ufos Real? Aliens And Ufo in Hindi. क्या ब्रह्माण्ड में कहीं और परग्रहवासी जीवन मौजूद हैं? Aliens, एलियन, परग्रहवासी, दूसरी दुनिया के लोग, Extra-terrestrials, UFO जो भी कहे…हम हमेशा यह सोचते रहते हैं की क्या हमारी पृथ्वी (Earth) के सिवाय इस विशाल ब्रह्माण्ड में कही और जीवन मौजूद हैं? हम कई बार टीवी पर या news में alien sightings या ufo sightings की खबरे देखते हैं लेकिन आज तक उनका कोई पक्का proof या evidence नहीं मिला हैं. हम इसका जवाब जानने के लिए कई तरह की Science और Philosophy की किताबें या space documentery देखते हैं. लेकिन कभी भी संतोषजनक जवाब नहीं मिल पाता.
एलियन, परग्रहवासी होते तो है जरूर -Alien, then there are Prgrhwasi -

क्या हमारे ब्रह्माण्ड में केवल हमारे ग्रह पर ही जीवन मौजूद हैं? observable यूनिवर्स यानी की देखने लायक ब्रह्माण्ड का व्यास नब्बे अरब प्रकाश वर्ष है. यहाँ पर कम से कम एक अरब आकाशगंगाए हैं. ऐसी हर एक आकाशगंगा में कम से कम एक अरब तारें हैं. हाल ही में हमने समजा हैं की ब्रह्माण्ड में ग्रह एक आम चीज़ हैं और शायद ब्रह्मांड में अरबों ऐसे ग्रह हैं जो रहने योग्य (habitable planets) हैं. इसका मतलब यह हैं की जीवन का अस्तित्व होने के और उसके विकसित होने के कई सारे अवसर हैं. लेकिन सवाल हैं – कहाँ? अगर ऐसा हैं तो फिर हमारा ब्रह्माण्ड अंतरिक्ष यानों से भरा हुआ नहीं होना चाहिए? चलिए एक कदम वापस ले चलते हैं. अगर अन्य आकाशगंगाओं में एलियन सभ्यता मौजूद हैं तो भी उनके बारे में पता लगाने का हमारे पास कोई भी रास्ता नहीं हैं. सामान्य रूप से हमारी आकाशगंगा के पड़ोस (जिसे स्थानीय समूह या Local Group भी कह सकते हैं) में जो कुछ भी हैं वह हमेशां के लिए हमारी पहुँच के बाहर ही रहेंगा. ऐसा इसलिए क्योंकि ब्रह्माण्ड का विस्तार हो रहा हैं. अगर हमारे पास सबसे तेज अन्तरिक्ष यान भी होगा तब भी उन स्थानों तक पहुँचाने के लिए अरबों साल लगेंग

 तो, चलिए मिल्की वे पर ही ध्यान केंद्रित करते हैं. मिल्की वे हमारी अपनी आकाशगंगा हैं. इसके अन्दर लगभग 400 अरब सितारे मौजूद हैं. तारों की यह बहुत ही बड़ी संख्या हैं. हमारी आकाशगंगा में लगभग 20 अरब सूरज जैसे तारें हैं, और वैज्ञानिकों का यह अनुमान हैं की उनमे से हर पांच वे तारें के हैबिटेबल जोन में पृथ्वी जैसा ग्रह मौजूद हो सकता हैं. इन सब ग्रहों में से केवल 0.1% ग्रहों पर ही जीवन होने की संभावनाए हैं. फिर भी इसका मतलब यह हुआ की हमारी मिल्की वे आकाशगंगा में 1 लाख जितने पृथ्वी जैसे और जीवन से भरपूर ग्रह हैं. हमारी मिल्की वे लगभग 13 अरब वर्ष पुरानी है. शुरुआत में यह जीवन के लिए एक अच्छी जगह नहीं थी. क्योंकि तब ब्रह्माण्ड में हर जगह विस्फोट हो रहे थे. लेकिन एक-दो अरब साल बाद सबसे पहले रहने योग्य ग्रह पैदा हुए थे. पृथ्वी केवल 4 अरब साल पुराना ग्रह है. इसका मतलब भूतकाल में ब्रह्माण्ड के कई अन्य ग्रहों पर जीवन की मौजूदगी होने की पूरी संभावनाए हैं.

तो अगर इनमे से कोई सुपर सभ्यता अंतरिक्ष में विकसित हो गई हैं तो वह किस तरह के होंगे? इनकी तीन श्रेणियां हैं…

पहली श्रेणी :- इस श्रेणी की सभ्यता अपने ग्रह पर उपलब्ध सारी ऊर्जा का उपयोग करने में सक्षम होंगी. हम अपने ग्रह पर मोजूद उर्जा में से केवल 0.73% उर्जा का ही इस्तेमाल कर रहे हैं. लेकिन अगले 100 सालों के अन्दर ही हम पहली श्रेणी तक पहुँच जाएंगे.

दूसरी श्रेणी :- इस तरह की सभ्यताए अपने तारे में से उर्जा पाने में सक्षम हो सकती हैं. ऐसा करने में बहुत सारे विज्ञान की जरुरत पड़ सकती हैं लेकिन सैद्धांतिक रूप से ऐसा संभव हैं. Dyson sphere अवधारणा की तरह, सूर्य के आसपास एक विशाल परिसर की रचना कर के उसकी उर्जा को प्राप्त किया जा सकता हैं.

तीसरी श्रेणी :- इस प्रकार की एलियन सभ्यता अपनी पूरी आकाशगंगा और उसकी सारी उर्जा को नियंत्रित करने में सक्षम हो सकती हैं. ऐसी उन्नत सभ्यता हमारे लिए भगवान के समान होंगी.

अगर हमे तारों की यात्रा करने के लायक प्रजाति बनना हैं तो हमे हमारी प्रजाति को हजारों सालों तक बनाए रखना होंगा. तब जाकर हम हमारी पूरी आकाशगंगा में उपनिवेश स्थापित कर सकते है. यह एक लंबे समय की तरह लग रहा हैं, हैं ना. लेकिन याद रखीए, मिल्की वे बहुत बड़ी आकाशगंगा हैं.

उन्नत एलियन प्रजातियाँ

लेकिन अगर दूसरे ग्रह पर जीवन मौजूद हैं तो अब तक हमे मिला क्यों नहीं? ऐसा भी तो हो सकता हैं की किसी भी तरह के जटिल जीवन का विकसित होना हमारी सोच से कई ज्यादा कठिन हो. जीवन की शुरुआत होने के लिए जिस तरह की आवश्यकताए जरुरी हो, वह वास्तव में बहुत जटिल हो सकती हैं. हो सकता है कि अतीत में ब्रह्माण्ड जिस तरह से अधिक प्रतिकूल जगह था लेकिन हाल ही में चीज़े ठंडी होने से जटिल जीवन को संभव बनाने के लिए योग्य परिस्थितिया मौजूद हुई हो.

यह भी हो सकता हैं की हमारे ग्रह जैसा जीवन काफी आम हो और हमारे जैसे बुद्धिजीविओं का अस्तित्व कोई बड़ी बात न हो. अगर ऐसा है, तो where are all the aliens? सभी एलियंस कहा पर हैं? इस सवाल को फर्मी विरोधाभास (Fermi Paradox) कहाँ जाता हैं. कोई भी इसका जवाब नहीं दे सकता. यह पता करने के लिए कोई रास्ता नहीं है. एक अंतिम विचार यह हैं की शायद हम अकेले हैं. अभी हमारे पास हमारे ग्रह के अलावा किसी भी जगह पर जीवन होने का कोई भी सबूत नहीं है. कुछ भी नहीं. ब्रह्माण्ड खाली और मृत प्रतीत होता हैं. कोई भी हमे संदेश नहीं भेज रहा और कोई भी हमारे संदेशों का जवाद नहीं दे रहा. शायद हम एक शाश्वत ब्रह्मांड में एक छोटी सी नम मिट्टी की गेंद पर फंस गए हैं.

क्या इस विचार ने आपको डरा दिया? अगर आपका जवाब हाँ हैं तो आपके दिमाग में सही भावनात्मक प्रतिक्रिया हो रही है. अगर हम इस ग्रह पर जीवन को मरने देते हैं तो, ब्रह्माण्ड में कहीं पर भी जीवन नहीं रहेंगा. जीवन चला जाएगा, शायद हमेशा के लिए. क्योंकि शायद हमारे ग्रह पर ही ब्रह्माण्ड के पहले जीवन की शुरुआत हुई हो सकती हैं. अगर ऐसा हैं तो हमे जीवन को बनाए रखना होगा ताकि उसे हम ब्रह्माण्ड में अन्य जगहों तक फैला सके. ब्रह्माण्ड ख़ूबसूरत हैं और इसमें कोई तो होना ही चाहिए जो उसे अनुभव कर सके…

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धरती पर ऐसी जगह जहां से जिंदा आना है मुश्किल-A place where the earth is hard to come alive

 Irfan point     विचित्र दुनिया   

पृथ्वी पर सबसे खतरनाक जगह Most Dangerous Places in The World कहाँ पर है? पृथ्वी की सतह पर कौन सी जगह लगातार खतरनाक हैं-तो चलिए सबसे पहले तापमान से शुरू करते हैं. अत्यधिक गर्मी और अत्यधिक ठंड एक घंटे के भीतर ही हमारी जान ले सकते हैं. ठंडे वातावरण में, कपड़ों के बिना मानव शरीर जीने के लिए पर्याप्त उच्च तापमान को बनाए रखने के लिए सक्षम नहीं होता. इसके लिए वह बहुत काम करता हैं. अगर आप किसी इंसान को किसी तरह के कपड़ो के बिना ही 0 डिग्री सेल्सियस जितने तापमान के वातावरण में डाल दे तो वह इंसान शरीर के अन्दर के तापमान में गिरावट से मर जाएगा, 20 मिनट के अन्दर. हमे गर्मी की जरुरत होती हैं. लेकिन हमे जिस चीज़ की उससे भी अधिक जरुरत हैं वह हैं ऑक्सीजन.
धरती पर ऐसी जगह जहां से जिंदा आना है मुश्किल-A place where the earth is hard to come alive

माउंट एवरेस्ट--

. पृथ्वी की एक ऐसी जगह जिसकी सतह पर हवा अविश्वसनीय रूप से पतली होती हैं. माउंट एवरेस्ट के शीर्ष पर समुद्र लेवल की तुलना में केवल एक तिहाई रूप में ही सांस लेने लायक ऑक्सीजन होता हैं. अगर आपको अपने घरे से अचानक ही माउंट एवेरेस्ट की टोच तक टेलिपोर्ट कर दिया जाए तो अचानक ही आई ऑक्सीजन की कमी के कारण 2-3 मिनट के अन्दर ही आपकी मौत हो जाएगी.

मेरियाना गर्त (Mariana Trench)--

मौत इससे भी ज्यादा जल्दी आएगी अगर आप मेरियाना गर्त (Mariana Trench) के नीचे होंगे. तब आप 7 मिल यानी की 11 किलोमीटर गहरे पानी के निचे होंगे. इतनी गहराई में आपके शरीर पर प्रति वर्ग इंच पर 15,000 पाउंड जिनता दबाव पड़ता हैं. सामान्य गहराई में तो आप अपनी सांस को रोक सकते हैं, लेकिन बहुत ज्यादा गहराई और ज्यादा दबाव वाले पानी में आपके फेंफडे तुरंत ही नष्ट हो जाएंगे. बिना ऑक्सीजन के आपका दिमाग 15 सेकंड के अन्दर ही अचेत हो जाएंगा और 90 सेकंड के अन्दर आपकी मौत हो जाएंगी.

univers-अंतरिक्ष में-

आपकी इससे भी ज्यादा जल्दी मौत होंगी अंतरिक्ष में बिना स्पेससूट के. लेकिन पिघले हुए लावे की झील में कूदना मौत का एक शानदार तरीका हो सकता हैं. जैसे की कई हॉलीवुड की फिल्मों में दिखाया जाता हैं उस तरह हमारा शरीर लावे में धीरे धीरे नहीं पिगलता. गर्म पिगले लावे में जाते ही आपका शरीर पटाको तरह फटने लगेंगा, किसी आतिशबाजी की तरह. क्योंकि पिघला हुआ लावा तरल चट्टान होता हैं. आप अपने जीवनकाल में जितना ज्यादा तापमान महसूस करते हैं उससे भी 4 गुना ज्यादा. मानव शरीर मुख्य रूप से पानी से बना है और लावे में जाते ही भाप में बदल जाता हैं.

संक्रमित जगह --

सन 1918 में, इन्फ्लूएंजा के कारण 100 मिलियन लोगों की  मौत हुई थी. जो की उस वक़्त लगभग दुनिया की पूरी आबादी का 3% थी. लेकिन जिन जगहों पर प्लेग जल्दी से फैल रहा हो वह ज्यादा खतरनाक जगह हैं. सन 1347 और 1353 के बीच यूरोप में bubonic प्लेग के कारण हर तीसरे व्यक्ति की मौत हो चुकी थी. bubonic प्लेग Yersinia pestis के कारण फैलता एक संक्रमण हैं. कुल घातक परिणामों के संदर्भ में, प्लेग और इन्फ्लूएंजा इस चीज़ के आगे तो कुछ भी नहीं हैं – प्लाज्मोडियम. यह एक सूक्ष्म जीव है जो मच्छर के काटने से हमारे रक्त में मिल जाता है और मलेरिया का कारण बनता है. मानव इतिहास में मलेरिया से होनेवाले मौत की संख्या अविश्वसनीय है. तो जिस जगह पर ज्यादा मलेरिया के मच्छर होते हैं वह पृथ्वी की खतरनाक जगह हो सकती हैं.

पृथ्वी के सबसे खतरनाक स्थानों से संबंधित चीज़ हैं सबसे खतरनाक जानवर, यानी इन्सान. La Oroya शहर पेरू का एक खनन का शहर हैं. जहाँ हत्या की दर कम है लेकिन प्रदूषण अधिक है. शहर के स्मेल्टर हवा में प्रदूषण का उत्सर्जन करते है जो वहाँ के वातावरण को प्रदूषित करते हैं. यह शहर किसी सुरक्षित शहर की तुलना में 85 गुना अधिक आर्सेनिक है. लेकिन रशिया के Lake Karachay की तुलना में तो यह कुछ भी नहीं हैं. इसे World Watch Institute के द्वारा पृथ्वी पर सबसे अधिक प्रदूषित स्थान नामित किया गया था. इस झील में इतने सारे रेडियोएक्टिव प्रदूषक होते है की इससे आप विकिरण की एक घातक खुराक प्राप्त कर सकते हैं. ग्लोबल पीस इंडेक्स अपराध और राजनीतिक भ्रष्टाचार के आधार पर तय करता हैं की कोई भी देश कितना सुरक्षित हैं. इसके अनुसार दुनिया का सबसे सुरक्षित देश आइसलैंड हैं, और सबसे कम सुरक्षित सोमालिया है. लेकिन दुनिया का सबसे ज्यादा मर्डर रेट मेक्सिको के जुआरेज शहर में हैं. यहाँ पर 1 लाख निवासियों में से हर साल 1,477 लोगों की हत्या हो जाती हैं.

अंतरिक्ष में तैरता हुआ कोई भी एस्टेरोइड कभी भी पृथ्वी से टकरा सकता हैं और उसका नाश कर सकता हैं. आप पर रस्ते पर चलते चलते कभी भी आसमानी बिजली गिर सकती हैं. आप घर में सो रहे हो और अचानक भूकंप की वजह से आपके घर की छत आप पर गिर सकती हैं या किसी स्विच को दबाते वक्त आपको करंट लग सकता है. आप जंगल में हो और पीछे से कोई शेर आप पर हमला कर सकता हैं. आप रस्ते में जा रहे हो और पीछे से कोई भी कार आप को ठोक सकती हैं. तो देखा जाए तो दुनिया में कोई भी जगह सुरक्षित नहीं हैं, पृथ्वी पर हर एक जगह खतरनाक हैं.
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जानिए सपने का क्या मतलब होता है-Learn More. What is the meaning of dreams is-

 Irfan point     विचित्र दुनिया   

सपने। रहस्यमय, विस्मयकारी, आँखे खोल देनेवाले और कभी कभी भयानक नरक का अनुभव कराने वाले। ज्यादातर लोग यहीं सोचते हैं की मेरे सपने का मतलब क्या हैं? What Does My Dream Mean ? विज्ञान इसी सवाल के जवाब की दिशा में आगे बढ़ रहा हैं. आज यहाँ हम सपनों के बारे में कुछ ऐसी बाते जानेंगे जो अपने न कभी देखी होगी और न ही सुनी होगी। सपनो के बारे में कुछ अनसुने तथ्य Dream Facts in Hindi.
जानिए सपने का क्या मतलब होता है-Learn More. What is the meaning of dreams is-

 सपने के दौरान आप पढ़ नहीं सकते और टाइम नहीं बता सकते  --

जब आप तय नहीं कर पा रहे हो की आप सपना देख रहे हैं या नहीं देख रहे हैं उस वक्त कुछ पढने की कोशिश कीजिये। दुनिया में ज्यादातर लोग ऐसी अवस्था के दौरान कुछ भी पढने में सक्षम न होने का दावा करते हैं। ऐसी ही अवस्था के दौरान घडी देखने पर समय का सही अंदाजा नहीं लगा सकते  हैं। जितनी भी बार आप घडी देखेंगे उतनी बार आपको अलग ही टाइम दिखेगा। और घडी देखने के लिए अपना हाथ आगे लायेंगे तब आपका हाथ आपको हिलता हुआ लगेगा।

होश में रहते हुए दिखाई देनेवाला सपना (LUCID DREAMING) 

दुनिया में LUCID DREAMING का अभ्यास करनेवाली एक पूरी उप संस्कृति हैं। अलग अलग तकनीकों के इस्तेमाल से यह लोग सपनों को नियंत्रित कर के अदभुत चीजों का अनुभव करते हैं। जैसे की उड़ना,दीवालों के बीच से गुजरना,अलग आयाम में चले जाना और यहाँ तक की समय में पीछे चले जाना।

किसी घटना का उसके होने से पहले ही सपने में दिख जाना --

कई बार लोग कोई सपना देखते हैं और बाद में ठीक वैसी ही घटना उनके वास्तविक जीवन में होती हैं। आप कहेंगे की आप को भविष्य की एक झलक मिल गयी या वह केवल एक संयोग हो सकता हैं। लेकिन वास्तविक जीवन में भी कई लोगो के साथ ऐसी विचित्र घटनाएँ हो चुकी हैं।


नींद में अचानक झटके के साथ जाग जाना – खड्डे में गिरने जैसा अनुभव होना 

कई बार सपना देखते वक्त लोग महसूस करते हैं की वह चलते चलते अचानक किसी खड्डे में गिर गए या जोर से किसी चीज़ से टकरा गए। ऐसा होने पर वे झटके के साथ नींद में से जाग जाते हैं और गभरा जाते हैं।

नींद में लकवा मार जाना (SLEEP PARALYSIS) 

SLEEP PARALYSIS को दूसरे शब्दों में नरक का अनुभव भी कह सकते हैं। वह एक डरावने सपने जैसा ही हैं। दुनिया में कई लोग इसका भयानक अनुभव करते हैं। इस अवस्था में मुख्य दो चीज़े महसूस होती हैं। एक हैं हिलने में असमर्थता और दूसरी रूम के अंदर शैतान की उपस्थिति महसूस करना। यह सपने की तरह महसूस नहीं होता हैं लेकिन 100 % सच्चा लगता हैं।

REM (rapid-eye-movement) sleep disorder 

इस तरह की अवस्था में ज्यादातर पूरा शरीर paralyze हो जाता हैं। और लोग सपने से बाहर आकर प्रतिक्रिया करते हैं। कई लोगो ने  इस अवस्था में अपना हाथ तोडा हैं,फर्नीचर को नुकसान पहुँचाया हैं और कुछ लोगो ने तो अपना घर ही जला दिया हैं।

Sexual dreams 

बहुत से वैज्ञानिको ने इस अवस्था का नाम “nocturnal penile tumescence” दिया हैं। हम में से ज्यादातर लोग इसे महसूस करते हैं। इसलिए इसके बारे में ज्यादा चर्चा करने की जरुरत नहीं हैं।

नींद में चलने वाले लोग-Sleepwalking

 एक बहुत ही दुर्लभ और संभावित खतरनाक नींद विकार है। REM (rapid-eye-movement) sleep disorder का एक चरम रूप है। इसमें लोग केवल सपनों के बाहर जाकर प्रतिक्रिया ही नहीं करते बल्कि रात को असली रोमांच पर भी निकल जाते हैं। कई बार लोग नींद में चलते चलते कई किलोमेटर्स दूर भी चले जाते हैं।

सपने देखने की आदत 

कुछ लोगो को सपने देखना बहुत अच्छा लगता हैं। वो चाहते होते हैं की वह नींद से कभी जगे ही नहीं। उन्हें दिन के दौरान भी सपना देखना अच्छा लगता हैं। कुछ लोग तो ज्यादा सपने देखने के लिए शक्तिशाली दवाईयाँ भी लेते हैं।

पालतू जानवर भी सपना देखते हैं

आपको यह जानकर बड़ी हैरानी होगी लेकिन आपके पालतू जानवर कुत्ता या बिल्ली भी अच्छी तरह से सपने देखते हैं। आप ने कई बार देखा होगा की आप का कुत्ता या बिल्ली नींद में अपने पंजे चला रहे है या फिर शोर कर रहे हैं या किसी चीज़ का पीछा कर रहे हैं।

आप हमेशा सपना देखते हैं लेकिन याद नहीं रख पाते 

ज्यादातर लोगो का मानना हैं की वे सपना नहीं देखते हैं। लेकिन यह सच नहीं हैं। हम सब सपने देखते हैं लेकिन हम में से 60 % लोग उन्हें याद नहीं रख पाते हैं।

अंधे लोग भी सपना देखते हैं 

जो लोग अंधे पैदा नहीं हुए होते वैसे अंधे लोग सपने में तस्वीरे देख सकते हैं। लेकिन जो पैदा ही अंधे हुए हैं वैसे लोगो का सपना दिलचस्प होता हैं। ऐसे लोग सपने में कुछ भी नहीं देख सकते हैं फिर भी उन्हें सपने आते हैं। उनके सपनों में वह आवाज सुन सकते हैं और अलग अलग इन्द्रियों को महसूस कर सकते हैं।

सपने में हम सिर्फ वही चेहरे देख सकते हैं जिन्हें पहले से जानते हैं 

यह साबित हो चूका हैं की सपनों में हम केवल वही चेहरे देख सकते है जिन्हें हमने पहले से ही देखा हुआ हो। इस लिए अगर आप ने बस में किसी डरावनी बूढी महिला की शक्ल पहली बार भी देखी हो तो वह भी रात को आप के सपने में आ सकती हैं।
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भुत या आत्मा पर वैज्ञानिक परीक्षण -Ghost or spirit of scientific tests -

 Irfan point     विचित्र दुनिया   

भूत का अनुभव करने का दावा दुनिया में ज्यादातर लोग करते हैं. ऐसी कई horror stories आज भी दुनिया में प्रचलित हैं. लेकिन इन कहानियों में कितनी सच्चाई होती हैं? लोदों को ऐसे अनुभव के दौरान वास्तव में क्या होता हैं और science इसके बारे में क्या कहता हैं? आइये जानते हैं: Scientific Explanations For Ghost and Spirits in hindi. भूत के लिए कुछ वैज्ञानिक स्पष्टीकरण.
भुत या आत्मा पर वैज्ञानिक परीक्षण -Ghost or spirit of scientific tests -

मस्तिक की इलेक्ट्रिक उत्तेजना

पूरी दुनिया में ऐसे कई चश्मदीद गवाह हैं जिन्होंने छायावाली आकृतियों (Shadow People) को देखा हैं. उनके मुताबिक ऐसे जानवर उनकी आँखों के कोने से उनकी तरफ झाँख रहे होते हैं और जब वे उन्हें देखते हैं तो वे गायब हो जाते हैं. कई लोग विश्वास करते हैं की ऐसी आकृतियाँ राक्षश होती हैं, कुछ लोगो के मुताबिक वे astral bodies (आत्माएं) होती हैं, कुछ लोग मानते हैं की वे लोग Time Travellers (समय यात्री) होते हैं जो कुछ सेकंड के लिए यहाँ पर थे और फिर गायब हो गए.  हालांकि, कुछ शोधकर्ताओं के पास एक चौंकाने वाला सिद्धांत है.
जब स्विस वैज्ञानिकोंने एक मिरगी के रोगी के मस्तिष्क की उलेक्ट्रिक उत्तेजना को देखा तब उन्होंने एक डरावनी चीज़ देखी. रोगी ने उनको बताया की उसके पीछे एक छायावाली आकृति खड़ी हैं, जो उसकी हर एक हरकत की कॉपी कर रही थी. रोगी के मुताबिक जब वह खड़ा हुआ तब वह आकृति भी उसके साथ खडी हुई और जब डॉक्टर ने उसे एक कार्ड पढने के लिए दिया तब उस आकृतीने वह उसके हाथ से छीन लिया.
तो तब रोगी के दिमाग में उस वक़्त क्यां हो रहा था? उस वक़्त वैज्ञानिकोंने उस रोगी के दिमाग के बाए temporoparietal जंक्शन को stimulate किया हुआ था. temporoparietal जंक्शन मस्तिष्क का वह हिस्सा हैं जो  स्वयं के विचारों को परिभाषित करता है. इस प्रयोग के दौरान मस्तिष्क के इसी क्षेत्र में हस्तक्षेप किया गया था.  वैज्ञानिकों ने उस वक़्त रोगी के दिमाग में  स्वयं के शरीर को समझने की क्षमता को खराब कर दिया था. शोधकर्ता उम्मीद कर रहे हैं की इस बात को समजने की यहीं एक कुंजी हो सकती हैं. उनका मानना हैं की यहीं कारण हो सकता हैं की लोगो को छायावाली आकृतियों या एलियन जैसे जानवर दीखते हैं.
SCARY GHOST,CREEPY GHOST,CREEPY GHOST FACE
Ideomotor Effect
लगभग एक शतक पहले दुनिया भर में और ज्यादातर अमेरिका में लोग एक चीज़ पर ज्यादा विश्वास करते थे और अभी भी कुछ लोग करते हैं. वह हैं Ouija board. यह बोर्ड लोगों को उनके मृत प्रियजनों से बात करने का तरीका प्रदान करता था. इस बोर्ड पर कुछ अक्षर, नंबर और सिंपल शब्द (जैसे की yes या no) होते थे. लोग अपने हाथ उस बोर्ड पर मौजूद लकड़ी के एक टुकड़े पर रखते थे जिसे planchette कहा जाता हैं,  और वहां पर मौजूद आत्मा से सवाल पूछते थे. आत्मा  उस planchette को अलग अलग शब्दों पर ले जा कर प्रतिक्रिया करता था और उनके सवालों के जवाब देता था.
आत्माओं के साथ बातचीत के लिए एक और खौफनाक विधि होती थी जिसे table tilting. इस विधि के लिए कुछ लोग एक टेबल के आसपास राउंड बनाकर बैठ जाते और सभी लोग उनके हाथ टेबल पर रखते और आश्चर्यजनक रूप से टेबल अपने आप हिलना शुरू हो जाता. कई बार तो उड़कर कमरे के या घर के बाहर भी उड़ जाता था.
कुछ लोग ऐसी घटनाओं को सच मानते थे लेकिन ज्यादातर मुठभेड़ों में धोखाधड़ी ही होती थी.  प्रसिद्ध भौतिक विज्ञानी माइकल फैराडे इस बात का पता लगाना चाहते थे. एक चालक प्रयोग के माध्यम से, फैराडे ने यह साबित किया की टेबल अक्सर ideomotor प्रभाव की वजह से हिलता था. इस प्रभाव के मुताबिक जब हमारे दिमाग को कोई सूचना या सुझाव मिलता हैं तब हमारी मांसपेशियां अनजाने में ही वह कार्य करने लग जाती हैं. सुझाव की शक्ति ही हमारी मांसपेशियों को अनजाने में स्थानांतरित करने का कारण बनती है. लोगो को पता नहीं होता लेकिन टेबल वे खुद ही हिला रहे होते हैं. वे चाहते हैं की टेबल वहाँ से हिले तो वह हिलता हैं, लेकिन उनकी वजह से. यहीं प्रभाव Ouija board पर भी लागू होता हैं.

Infrasound

हम मनुष्य 20,000 Hertz की आवाज को सुन सकते हैं. लेकिन हमारे लिए 20 हर्ट्ज से कम आवृत्ति की आवाजे सुनना बेहद मुश्किल हैं. ऐसी खामोश आवाजों को Infrasound कहाँ जाता हैं. ज्यादातर हम इन आवाजों को सुन नहीं सकते हैं लेकिन उनके कम्पनों को महसूस अवश्य कर सकते हैं.
डॉ. रिचर्ड वाइजमैन के मुताबिक हम विशेष रूप से हमारे पेट में इन तरंगों को महसूस कर सकते हैं और तब यही तरंगे सकारात्मक या नकारात्मक भावनाएं उत्पन करती हैं. अगर आसपास का वातावरण सहीं रहा (जैसा की किसी भूतिया कहलानेवाले घर का होता हैं) तब डर की भावना पैदा हो सकती हैं.
Infrasound तूफान, हवाए, मौसम के पैटर्न और यहाँ तक कि हर रोज के उपकरणों के द्वारा उत्पन हो सकता हैं. हमारी आँखों के नेत्रगोलको के हिलचाल की आवृत्ति 20 Hz के आसपास होती हैं. इसी तरह, डॉ वाइजमैन का भी मानना है की ऐसे कंपन ही भूतिया  स्थानों पर असाधारण गतिविधि के लिए जिम्मेदार हैं. उदाहरण के लिए, जब वे दो अंडरग्राउंड जगहों की जांच कर रहे थे तब उन्होंने जमीन के ऊपर चल रहे ट्राफिक से आनेवाले infrasound के सबूत की खोज की. ऐसा माना जाता हैं की बिल्ली और कुत्तों जैसे जानवर ऐसी आवाजों को काफी अच्छी तरह से सुन सकते हैं.

Automatism (स्वचालन)

Automatism (स्वचालन) के दौरान चेतना की अवस्थाएं बदली हुई होती हैं. इस दौरान जब लोग कुछ भी बोलते हैं या सोचते हैं, उसके बारे में उन्हें कुछ भी पता नहीं होता हैं. जब एक मनोवैज्ञानिक उसके दिमाग को शुध्ध करता हैं तब वह एक दोस्ताना स्पिरिट गाइड की खोज करने लगता हैं. यह स्पिरिट गाइड उस मनोवैज्ञानिक के शरीर में प्रवेश करता हैं और ब्रह्मांड के बारे में गुप्त ज्ञान प्रदान कराता हैं.
जब एक मनोवैज्ञानिक उसके दिमाग को शुध्ध या खाली करता हैं तब उसके दिमाग में random तस्वीरें और विचार आने शुरू हो जाते हैं. मनोवैज्ञानिक यह सोचता हैं की उसके दिमाग में यह तस्वीरे और विचार किसी अन्य वस्तु या अस्तित्व से आ रहे हैं.  हालांकि सच बात यह हैं की वे सब विचार उसके मन से ही उत्पन हुए होते हैं.
हमारे दिमाग हर तरह के विचारों को किसी भी तरह के सचेत प्रयास के बिना ही उन्हें मन में लाने के लिए सक्षम होते हैं. आपने कई बार पूरी तरह से विचित्र बुरे सपने या daydreams देखे होंगे. लेकिन यह कोई दूसरी दुनिया के स्पिरिट गाइड का काम नहीं हैं बल्कि आपका दिमाग होता हैं.

Temperature (तापमान)

अगर आप रात में कभी भी किसी डरावनी हवेली या घर की जांच करने के लिए गए हो तो तब आपने महसूस किया होगा की अचानक ही वहाँ पर ठंडी हवा बहने लगती हैं. लेकिन तब अगर आप कुछ कदम आगे या पीछे की ओर बढ़ाएंगे तब तापमान फिर से नार्मल हो जाएंगा. ऐसी जगह को भूतों का अध्ययन करनेवाले मनोवैज्ञानिक cold spot कहते हैं. घोस्टहन्टर्स के अनुसार, एक ठंडा स्थान असाधारण गतिविधि का संकेत है. जब भूत के पास कुछ खास करने के लिए नहीं होता तब वह पतली हवा की मदद से बाहर दिखाई देते हैं और लोगो को डराते हैं, क्योंकि उसे उर्जा की जरुरत होती हैं. तो भूत अपने आसपास के परिवेश से गर्मी को खींचते हैं और प्रकट होते हैं.
हालांकि, इस घटना के लिए वैज्ञानिकों के पास एक बहुत सरल और अधिक बोरिंग स्पष्टीकरण है. जब कुछ नास्तिकोंने भूतिया घरों की जांच की तब उन्होंने ज्यादातर घर की चिमनी से अन्दर की तरफ आती ठंडी हवा को नोटिस किया. लेकिन अगर कमरा पूरी तरह से सिल हो तब भी उसके लिए पूरी तरह से तर्कसंगत स्पष्टीकरण हैं. हर वस्तु के पास अपना खुद का तापमान होता हैं और कुछ चीज़े दूसरी चीजों की तुलना में ज्यादा गर्म होती हैं. तापमान को संतुलित करने की प्रक्रिया के दौरान ऐसे पदार्थ अपनी गर्मी खोते हैं. इसे 

संवहन (convection) कहाँ जाता हैं.

यह घुमती हवा किसी व्यक्ति की त्वचा की तुलना में ज्यादा ठंडी महसूस होंगी. यह हवा उस जगह को एक cold spot होने का एहसास करवाती हैं. तो अगली बार अगर आप किसी भूतिया उपस्थिति को महसूस करे तो हीटर चालू कर दीजिए.

Camera Issues (कैमरा इश्यूज)

घोस्टहंटर के प्रकाश के गोलों के लिए प्यार-नफरत के संबंध होते हैं. प्रकाश के इन चमकीले गोलों को लोगो की आत्माएं माना जाता हैं, यह वे लोग हैं जो मर चुके हैं लेकिन पूरी तरह से नहीं. आंखों के लिए अदृश्य इन गोलों को केवल तस्वीरों में देखा जा सकता है और वहाँ से चीज़े मुश्किल होना शुरू हो जाती हैं. जब कोई कीड़ा या धुल उड़ते उड़ते कैमरा के ज्यादा करीब आ जाते हैं तब वह उस वक़्त खिचे हुए फोटो में ब्लर वाला और बिना फोकस वाले सर्किल के रूप में दीखता हैं. इसके लिए कैमरा फ़्लैश भी उतना ही जिम्मेदार होता हैं, क्योंकि इसकी वजह से यह गोले चमकदार दीखते हैं और उन्हें भूत मान लिया जाता हैं. कुछ नकली एडिट किए फोटोज भी होते हैं जिन पर ज्यादातर लोग विश्वास कर लेते हैं.

Carbon Monoxide poisoning (कार्बन मोनोऑक्साइड विषाक्तता) 

कार्बन मोनोआक्साइड एक बिना गंध और बिना रंगवाला गैस है, जिसकी मौजूदगी का पता लगाना बेहद मुश्किल हैं. यह खतरनाक है क्योंकि हमारी लाल रक्त कोशिकाए ऑक्सीजन की तुलना में ज्यादा आसानी से कार्बन मोनोक्साइड को अवशोषित करती हैं. तब इस ऑक्सीजन का अभाव  कमजोरी, मितली, भ्रम और अंत में मौत का कारण भी बन सकता हैं. लेकिन इन सब से पहले आपको मतिभ्रम अनुभव होगा. जिसकी वजह से आप को अचानक हि कोई भी चीज़ दिख सकती हैं. जिसे आप भूत समज बैठते हैं.

Mass Hysteria (मास हिस्टीरिया)

जब एक से ज्यादा लोग एक साथ बहुत तनाव में होते हैं तब यह सामूहिक भ्रम महसूस होता हैं. कोई दमनकारी वातावरण, जैसे की स्कूल या ऑफिस. यह तनाव बाद में सिर दर्द, मतली, या हिंसक ऐंठन के रूप में शारीरिक लक्षणों में बदल जाता है. इसलिए कई बार लोग एकसाथ किसी अन्य चीज़ को देखकर उसे भूत समज बैठते हैं. कई बार हालत भी साथ दे देते हैं.

Quantum Mechanics (क्वांटम यांत्रिकी)

क्वांटम यांत्रिकी में छोटे से भी छोटे प्रकार के पदार्थ का अध्ययन किया जाता है. हालांकि यह बात बहुत ही अजीब लगेगी जब कुछ भौतिकशास्त्री आत्माओं और भूतों के बारे में बात शुरू कर देंगे. जैसे की डॉ स्टुअर्ट हेमरोफ और उनके भौतिक विज्ञानी दोस्त रोजर पेनरोज. इन दोनों का यह मानना हैं की इन्सान की चेतना हमारे मस्तिष्क  की कोशिकाओं के अंदर की सूक्ष्मनलिकाओं से आती हैं, और यह नलिकाए टम प्रसंस्करण के लिए जिम्मेदार हैं.
उनके मुताबिक जब इन्सान की मौत से करीबी मुठभेड़ होती हैं तब दिमाग के अन्दर की सभी क्वांटम माहिती बाहर निकल जाती हैं, लेकिन बाहर होते हुए भी अस्तित्व में रहती हैं. इसलिए कुछ लोग आउट ऑफ बॉडी अनुभव को महसूस करने की बात करते हैं.
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भूतों की दुनिया के राज भूत के साथ-The secret world of ghosts with ghosts

 Irfan point     विचित्र दुनिया   

ट्रेडिशनल द्रष्टिकोण से देखे तो भूत मरे हुए इन्सान का आत्मा हैं जो किसी कारण से उसके वर्तमान में फ़स गया हैं और वहाँ बाहर नहीं निकल पा रहा। भूतों में विश्वास करनेवालों का मानना हैं की यह आत्मा नहीं जानती की उसका शरीर मर चूका हैं। मतलब भूत एक इन्सान हैं जो मर चूका हैं। हम सब अपने शरीर के अन्दर की आत्माएं हैं। हमारी मौत के बाद हमारा आत्मा दूसरे आयाम में जाता हैं। किसी तह की चोट आने पर होने वाली मौत के दौरान आत्मा हमारी भौतिक दुनिया में फ़स जाता हैं जिसे उसके अगले आयाम में जाने की जरूरत होती हैं। इस प्रकार के भूत एक किसम के कैदखाने में रहते हैं जिसमे शामिल हैं उनके मौत की जगह या फिर वह जगह जहाँ उसकी जिंदगी में उसे चैन मिलता था। इन जगहों पर वह भटकते रहते हैं।


भूतों की दुनिया के राज भूत के साथ-The secret world of ghosts with ghosts
इस प्रकार के भूत हमारी भौतिक जिंदगी में भी दखल दे सकते हैं। इन भूतों को उनकी जिंदगी की घटानाए याद होती हैं और ऐसी ही कोई घटना उसके इलाके के आसपास होती हैं तो वह उसकी तरफ आकर्षित होते हैं। कुछ लोगों का मानना हैं की वे आत्माओं के साथ Communicate कर सकते हैं। ऐसी लोग आत्माओं को यह जानने में मदद करते हैं की वे मर चुके हैं और उन्हें उनके अस्तित्व में आगे के आयाम में जाना हैं।


दुनियाभर के लोगो के अनुभवो मुताबिक भूतों के प्रकार 


संदेसक

इस तरह के भूत बहुत ही आम हैं। ज्यादातर ऐसे भूत उन के परिवारजनों या करीबियों को मर जाने के बाद दीखते हैं। उनको उनकी मौत के बारे में पता होता हैं और वे बातचीत कर सकते हैं। ऐसे भूत अपने प्रियजनों के लिए सन्देश लाते हैं की वे जहाँ कही भी हैं आराम से हैं और खुश हैं,उनको उसकी मौत पर शोक नहीं करना चाहिए। यह ज्यादातर केवल एक ही बार दिखाई देते हैं अपने इरादे से ऐसा करते हैं।

परेशान करनेवाले भूत

इस तरह के भूतों से लोग सबसे ज्यादा डरते हैं क्योंकि ऐसे भूत हमारे भोतिक जीवन पर सबसे ज्यादा असर डालते हैं। इन भूतों को अस्पष्टिकृत और डरावने आवाज,दीवाल की पिटाई,पैरों की आवाज जैसी अनेक चीजों का कारण माना जाता हैं। वह हमारी चीज़े रख लेते हैं और छुपा देते हैं केवल उन्हें वापस देने के लिए। वे घर के नल चालू कर देते हैं,दरवाजो को जोर से टक्कर माँरते हैं या खोल के बंद करते हैं,घर की लाइट्स को चालू – बंद करते हैं और यहाँ तक की Toilets को फ्लश करते हैं। चीजों को घर में इधर उधर फैंक देते हैं। लोगो के कपड़े खींचने के किस्से सबसे ज्यादा प्रचलित हैं।

कुछ भूत ऐसे होते हैं जो उनके मनुष्य शरीर के अनुरूप शरीर को ढूंढकर उसके प्रवेश कर लेते हैं और उसके शरीर पर कब्ज़ा कर लेते हैं। लोगो का मानना हैं की ऐसे भूत उसके जीवन काल के दौरान अधूरी रही इच्छाओं को दूसरे शरीर में घुस कर पूरी करता हैं। इनमें से प्रचलित किस्से हैं उसके विरोधियों को परेशान करना और डराना । कई बार जिस के शरीर में  घुसा हो उसको भी उसको भी नुकसान पहुंचाता हैं।

GhostHunters  भूतों के बारे मे कुछ रोचक  तथ्य


आत्मा जो भटक रही हैं और हमे डराना चाहती हैं वह हमारा ध्यान चाहती हैं।
भूतों और आत्माओं को समय की कुछ भी समज नहीं होती।
आत्माएं हमेशां यह नहीं समज पाती की उसका शरीर मर चूका हैं। उनके लिए यह एक डरावना सपना हैं जिसमे वे फ़स चुके हैं।
आत्माएं कई तरीको से हमारे साथ संपर्क कर सकती हैं। सपने,विचार,लिखावट,etc।
आत्माएं कभी कभी शरारती और हमेशा उत्सुक होती हैं।
आत्माएं रात में अधिक सक्रीय होती हैं।
आत्माएं कई बार प्रकट होती हैं। हवा में लहराती हुई सफ़ेद छाया के रूप में,काले साये के रूप में,ठंडी हवा के रूप में आत्मा की उपस्थिति स्पष्ट की जा सकती हैं।
भूतिया गतिविधियाँ बच्चों और वयस्कों के आसपास ज्यादा होती हैं। आपकी ज्यादा व्यक्तिगत उर्जा भूतों को ज्यादा आकर्षित करती हैं।
आत्माओं के अन्दर उनका व्यक्तित्व बरक़रार रहता हैं।
बच्चों और प्राणियों को भूत सबसे ज्यादा दिखते हैं।
आत्मा अक्सर सहायक हो सकता है।
भूत confusion में पड जाते हैं की वे वे यहाँ पर क्यों हैं? उन्हें क्या हुआ हैं? इन्सान उन्हें सुन क्यों नहीं पा रहे हैं?
भूत आपका दिमाग पढ़ सकते हैं।
भूत एक भौतिक शरीर नहीं है; वे शुद्ध ऊर्जा हैं।
भूतों के लिए संभावित वैज्ञानिक स्पष्टीकरण
भूत और Electrical Fields
भूतिया जगहों पर शोधकर्ताओं ने सामान्य जगहों की तुलना से ज्यादा और असामान्य उतार-चढ़ाव वाला मजबूत चुम्बकीय क्षेत्र होने का दावा किया हैं। जो पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र से समन्धित बात हो सकती हैं। इन्सान के आसपास चुम्बकीय क्षेत्र ज्यादा होने से उसको उसके आसपास किसी चीज या इन्सान के होने का आभास होता हैं। यह चुम्बकीय क्षेत्र इन्सान के दिमाग पर भी असर डालता हैं।

कम तापमान में ज्यादा भुत 

ठन्डे स्थानों पर बनी हुई इमारतों पर भूतों का दिखना या अनुभव होना एक आम बात हैं। ज्यादातर लोग अचानक आये हुए ठंडी हवा के जोंके को भी भूत मान बैठते हैं और गभरा जाते हैं। ज्यादा तापमान में कम हवा का जोका अच्छी तरह से महसूस होता हैं। एक बार ऐसा हो जाए और सभी परिस्थिति अनुकूल हो तो बाकि का काम तो हमारा दिमाग ही कर देता हैं।
कम आवृत्ति वाली ध्वनि तरंगे
कुछ प्रयोगों में साबित हुआ की ऐसी भूतिया जगहों पर कम आवृत्ति वाली तरंगो का साम्राज्य होता हैं जिसे infrasound भी कहते हैं। infrasound भूतिया अनुभूतियो का कारण हो सकती हैं। इससे घभराहट और बेचेनी की भावना के साथ रूम या जगह पर किसी की मौजूदगी का अनुभव होता हैं। ऐसी तरंगो को इन्सान आसानी से नहीं सून सकते लेकिन जानवर सून लेते हैं।

मेरी नजर में अगर लोग यह मानते हैं की उन्होने कोई भूत देखा हैं तो वह केवल उनके दिमाग में हैं। लोग भूत को देखते हैं क्योंकि वे भूत को देखना चाहते हैं। ज्यादातर तो लोगो का भ्रम ही भूत को जन्म देता हैं।लेकिन भूत का विषय आज भी एक रहस्य हैं।

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